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नोटबंदी पर डैमेज कंट्रोल में जुटी भाजपा   

Tue, 15 Nov 2016 01:54 AM IST
अनुज मित्तल /मेरठ
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नोट बंदी की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए ट्रांसपोर्टर ने भंडारे का आयोजन किया। - फोटो : अमर उजाला
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बड़े नोट बंद होने के बाद बने हालात में भाजपा नफा-नुकसान के आकलन में जुटी है। साथ ही जनता में जो असंतोष पनप रहा है, उसके डैमेज कंट्रोल के लिए भी भाजपा नेता और कार्यकर्ता मैदान में उतर गए हैं। आठ नवंबर की आधी रात से 500 और 1000 के नोटों का चलन बंद होने के बाद से अफरातफरी मची है। केंद्र की भाजपा सरकार के इस फैसले के बाद से अभी तक आम जनता के बीच स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। जनता पैसों के लिए बैंकों की लाइनों में लगी है तो भाजपा का सबसे बड़ा वोट बैंक व्यापारी वर्ग छह दिनों से हाथ पर हाथ धरे बैठा है। यही नहीं, बंद हुए नोट खपाने को लेकर भी व्यापारी और अन्य वर्ग बेचैन है।
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व्यापारियों की प्रमुख समस्या
- थोक व्यापारियों ने जो उधार बांटा था वह अचानक पुराने नोटों के रूप में वापस आ रहा है
- उधारी के ये लाखों रुपये बैंक में जमा करना और उसका हिसाब देना मुश्किल हो रहा है
- लोग बाजार में सामान खरीदने के एवज में बड़े नोट ही दे रहे हैं
- पुराने अधिकांश ग्राहकों से उधार चल रहा है। नहीं तो व्यापार कैसे चलेगा
- सभी से बड़े नोट लेंगे तो उसे नई करेंसी में चेंज करने की समस्या अलग से है।

जनता की परेशानी
- जनता के पास नकदी के रूप में अधिकांश नोट 500 और एक हजार के थे, जो बंद हो गए
- ये नोट बदलने, बैंक में जमा करने और बैंक से निकालने में ही जनता उलझी हुई है 
- घर के जमा पैसे खत्म हो गए, बाजार में छुट्टे नहीं मिल रहे, दिनचर्या तक बिगड़ गई है
- 100 या 50 के नोट पाने के लिए कामकाज छोड़कर बैंकों की लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है
- बैंकों से दो हजार के नोट ज्यादा मिल रहे हैं, जिन्हें बाजार में चलाना अलग से मुसीबत है

दबी जुबान बयां कर रहे दर्द
जो व्यापारी प्रधानमंत्री के फैसले को सराह रहे थे, अब हलकान होने पर दबी जुबान में अपना दर्द बयां करने लगे हैं। भाजपाइयों को चिंता सताने लगी है कि कुछ दिन यही हालात रहे तो जनता के साथ व्यापारियों का धैर्य भी जवाब दे सकता है, जो विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी पड़ सकता है। 
नमक ने किया अलर्ट
नोटों की किल्लत के बीच 11 नवंबर को नमक को लेकर फैली कोरी अफवाह के बाद शहर में कानून-व्यवस्था संभालना मुश्किल हो गया। इससे सकते में आए भाजपाई आनन-फानन में सड़कों पर उतर गए। लोगों को समझाया तो पुलिस-प्रशासन से भी मदद मांगी। अगले दिन नमक के वास्तविक रेट पर बिक्री की व्यवस्था कराई। 
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समझ गए जनता की नाराजगी
भाजपाई समझ गए कि नोटबंदी से जनता अब नाराज होने लगी है। ऐसे में 12 नवंबर को भाजपाइयों ने बैंक अफसरों से मिलकर व्यवस्था बेहतर करने की अपील की। जनता के बीच जाकर भी धैर्य रखने का आह्वान किया। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, सांसद राजेंद्र अग्रवाल, विधायक रविंद्र भड़ाना, सत्यप्रकाश अग्रवाल, मेयर हरिकांत अहलूवालिया, महानगर अध्यक्ष करुणेश नंदन गर्ग समेत तमाम भाजपाई डैमेज कंट्रोल में लगे नजर आए।
लगातार दे रहे अपडेट 
वर्तमान हालात पर पूरी भाजपा की नजर टिकी है। जहां विपक्ष मौके के इंतजार में है, तो भाजपाइयों की फीकी हंसी के पीछे की बेचैनी साफ नजर आ रही है। ऐसे में कार्यकर्ताओं से मंथन के बाद बड़े नेता लगातार शीर्ष केंद्रीय नेतृत्व को पूरे हालात से अवगत करा रहे हैं। भाजपाइयों का भी यह मानना है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो जनता और व्यापारियों का धैर्य टूट सकता है।
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