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भाजपा पार्षद के दो हत्यारों को 27 साल बाद उम्रकैद, 25-25 हजार अर्थदंड भी लगाया

Sun, 23 Dec 2018 12:08 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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court - फोटो : PTI
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मेरठ के थाना टीपी नगर के मलियाना में करीब 27 साल पहले हुए भाजपा के सभासद उमेश गुप्ता हत्याकांड में एडीजे-1 एफटीसी प्रकाश तिवारी ने दो हत्यारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।

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वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रजभूषण गर्ग ने बताया कि उमेश गुप्ता नगर महापालिका में सभासद थे। वर्ष 1989 में संपन्न हुए चुनाव में भाजपा के चुनाव चिह्न पर विजयी हुए थे। श्यामसुंदर गुप्ता निवासी किशनपुरा भी चुनाव लड़े थे जो हार गए थे। श्यामसुंदर गुप्ता व अशोक भाटिया निवासी चंद्रलोक थाना टीपीनगर उमेश गुप्ता से चुनाव और भूखंड की रंजिश मानते थे।

समय-समय पर हर मामले में अपने साथियों के साथ विरोध करते थे। भूखंड के संबंध में अशोक भाटिया की उमेश गुप्ता से मुकदमेबाजी भी चल रही थी। 17 दिसंबर 1991 में किशनपुरा के दुकानदारों में झगड़ा हो गया था। जहां पर क्षेत्रीय सभासद होने के नाते उमेश वहां पहुंचे। वहां बीचबचाव के प्रयास के दौरान आरोपियों श्यामसुंदर गुप्ता व अशोक भाटिया ने उमेश गुप्ता को देख लेने की धमकी दे दी थी। 

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उसी रात सभासद उमेश गुप्ता की चार लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। विवेचना के बाद पुलिस ने अशोक भाटिया, मनोज, राजेंद्र व श्यामसुंदर गुप्ता के खिलाफ चार्जशीट दी। जिसका विचारण सेशन न्यायालय में किया गया।

जहां वादी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रजभूषण गर्ग, नितिश गोयल व अनुज शर्मा ने वादी ओमप्रकाश, राजेश्वर त्यागी, वीर सिंह सहित अनेक गवाह न्यायालय में पेश किए। जिनके बयानों के आधार पर न्यायालय ने श्यामसुंदर गुप्ता और राजेंद्र को सजा सुनाई। अर्थदंड की राशि में से क्षतिपूर्ति के रूप में 50 हजार रुपये पीड़िता को दिलाने के आदेश किए। विचारण के दौरान अशोक भाटिया व मनोज की मृत्यु हो गयी थी। 

हत्यारों को फांसी होनी चाहिए थी : निर्मला
वारदात का शिकार हुए सभासद उमेश गुप्ता की पत्नी निर्मला गुप्ता ने कहा कि अदालत से इंसाफ मिला है। इसी उम्मीद के सहारे पैरवी कर रही थी कि मुझे अदालत से न्याय मिलेगा। अदालत के बाहर अपने भतीजे अधिवक्ता नितिश गोयल के साथ निर्मला ने बताया कि उसके पति की हत्या चुनावी व जमीनी रंजिश के कारण की गई थी।

उनका क्षेत्र में अच्छा सम्मान था। हत्या के समय प्रदेश में भाजपा सरकार थी। उस दौरान मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी शोक जताने घर आए थे। हत्यारों को फांसी होनी चाहिए थी। 
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दो हत्यारों को आजीवन कारावास
हत्या के 5 साल पुराने मामले में सुनवाई करते हुए एडीजे-17 विजय कुमार द्वितीय ने मनोज राठी पुत्र ओमवीर सिंह और सुनील गिरी पुत्र जयराम गिरी निवासी ग्राम रोहटा को उम्रकैद और प्रत्येक को 6500-6500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार बिन्नू ग्राम रोहटा के सत्यपाल सिंह के यहां मिनी ट्रक पर चालक था। 14 दिसंबर 2013 को गुड़ मंडी बड़ौत आढ़त पर गुड़ देकर और 92 हजार रुपये पेमेंट लेकर वह रोहटा लौट रहा था। लेकिन लापता हो गया था। 

बाद में बिन्नू की लाश मिनी ट्रक में रोहटा रोड के पास एक फार्महाउस के नजदीक पड़ी मिली। बिन्नू की सिर में चोट मारकर हत्या की दी गई थी। 92 हजार रुपये भी गायब मिले थे। इसका मुकदमा 14 दिसंबर 2013 को थाना सरूरपुर में दर्ज होकर कोर्ट में चार्जशीट दी गई।

सरकारी वकील ने 6 गवाह पेश किए। गवाहों ने बताया कि आरोपी मनोज और सुशील की बिन्नू से दोस्ती थी। आरोपी मनोज और सुशील गिरी के पास से खून के धब्बे लगे हुए रुपये भी बरामद हुए थे। गवाहों के बयानों और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को सजा सुनाई।

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