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रैन बसेसा

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बिना प्रचार धरे रहे इंतजाम, पशु आ रहे काम
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- किसी को रैन बसेरा पता नहीं तो किसी के पास आईकार्ड नहीं
- जरूरतमंद लोगों को रैन बसेरों तक ले जाने में विफल साबित हो रही व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। ठंड आते ही प्रशासन ने रैन बसेरे तो मुहैया करा दिए, लेकिन उनके प्रचार प्रसार में कंजूसी कर दी। आलम यह है कि इंतजाम होने के बाद भी लोग खुले में सर्द राते काटने को मजबूर हैं। वहीं अधिकतर लोगों को रैन बसेरे का पता नहीं तो किसी के पास आईकार्ड न होने पर उसे प्रवेश नहीं दिया गया। बुधवार रात 12 बजे ‘अमर उजाला’ ने बुधवार देर रात रैन बसेरों की व्यवस्था को परखा।
रैन बसेरा-1 : टाउन हॉल परिसर में 12 बेड का रैन बसेरा बना है। रात इस रैन बसेरे में चौकीदार को मिलाकर केवल तीन लोग ही मौजूद थे। पूछा कि लोग खुले में सोए हैं तो जवाब मिला कि वह कंबल लेने के लिए खुले आसमान के नीचे सोते हैं।
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रैन बसेरा 2 : बच्चा पार्क चौराहे से चंद कदम की दूरी पर एक और रैन बसेरा है। यहां 12 बेड हैं, जिनमें दो महिलाओं के लिए आरक्षित है। सात लोग यहां सोए थे। शेष पांच बेड खाली थे। यहीं से चंद कदम की दूरी पर कुछ लोग खुले आसमान के नीचे सोते दिखे।
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कुत्तों के साथ सोते दिखे लोग
टाउन हॉल परिसर में ही तीन अलग-अलग जगह खुले आसमान के नीचे लोग सोते दिखे। इनमें एक जगह कुछ लोग ऐसे थे, जिनके बीच कुत्तों का भी डेरा था। यहां से कुछ ही दूरी पर अहमद रोड पर ऐसा ही नजारा था। खुले में सो रहे लोगों ने बताया कि उन्हें रैन बसेरे के बारे में कोई जानकारी नही है, तो किसी ने कहा कि उनके पास आईकार्ड न होने पर रैन बसेरे में सोने के लिए मना कर दिया।
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