एटा में हुए दर्दनाक हादसे का परिवहन विभाग पर कोई असर नहीं दिखाई दिया। अधिकारियों ने चेकिंग कर जर्जर हो चुकी स्कूल बसों के खिलाफ कार्रवाई करना भी मुनासिब नहीं समझा। जबकि शहर और देहात क्षेत्र में जमकर खटारा स्कूल बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं। आरटीओ विभाग की माने तो पंजीकृत बसों में करीब पचास फीसदी बसे हर साल फिटनेस नहीं कराती हैं।
1100 बसे हैं पंजीकृत
आरटीओ से मिले आंकड़ों के मुताबिक जिले में छोटी-बड़ी करीब 1100 स्कूल-कॉलेज बस पंजीकृत हैं। बस ऑपरेटर सेटिंग के जरिये बसों को बिना फिटनेस के ही चलाते रहते हैं। आरआई राजेंद्र सिंह का कहना है कि फिटनेस पेनाल्टी कम होने के चलते ऑपरेटर सुरक्षा मानकों से खिलवाड़ करते रहते हैं।
एनजीटी ने रोका तो देहात में लगा दी बसें
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दस साल पुरानी बसों का संचालन प्रतिबंधित कर दिया है। एनजीटी के आदेश पर आरटीओ में इन बसों का फिटनेस नहीं किया जा रहा है। ऑपरेटरों ने कार्रवाई से बचने के लिए इन बसों को शहर से हटाकर देहात में भेज दिया है। ये जर्जर बसें बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रही है।
अभिभावक करे विरोध तो सुधरे हालात
स्कूली बच्चों के अभिभावक अगर खटारा स्कूल वाहन का विरोध करें तो हालात सुधर सकते हैं। अभिभावकों को अपने बस की फिटनेस, परमिट, इंश्योरेंस आदि से संबंधित जानकारी करनी चाहिए। अगर वाहन खटारा है तो स्कूल प्रबंधन से भी शिकायत करें।
चार हजार लगता है जुर्माना
बिना फिटनेस के बस पकड़े जाने पर बस का चालान कर चार हजार रुपये जुर्माना लगाया जाता है। बस में स्कूली बच्चे होने के चलते इसे सीज नहीं किया जाता। बस ऑपरेटर आरटीओ पहुंचकर जुर्माने का तो भुगतान कर देता है, लेकिन फिटनेस करने की जहमत नहीं उठाता।
नियमों को ताक पर रखकर चल रही बसें
मेरठ। शहर के स्कूलों में यातायात शुल्क के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी नहीं है। स्कूल संचालक बसों की खटारा स्थिति पर कोई ध्यान नहीं देते। पब्लिक स्कूलों में जो बसें संचालित हो रही हैं, उनमें नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।
ये हैं फिटनेस के मानक
बस की पूरी बॉडी सही हो और फ्लोर गला हुआ नहीं होना चाहिए।
बस का कोई भी टायर कटा या फटा ना हो।
बस में स्पीड गवर्नर लगा होना चगिए। साथ ही शीशे दुरुस्त और शीशों के बाहर पाइप ग्रिल लगी हो।
बसों में फर्स्ट एड बॉक्स, स्टपनी की व्यवस्था हो।
सभी सीट दुरुस्त हों और चालक के पास वैध डीएल होना चाहिए।
प्रत्येक बस में एक हेल्पर होना अनिवार्य है। बस का रंग पीला होना चाहिए।
बस के आगे पीछे और दोनों तरफ साइड में मानक अनुरूप रिफ्लेक्टर लगे हो, इंडीकेटर लाइट सही होनी चाहिए।
बसाें में आपातकालीन खिड़कियां हो।
हेल्पलाइन नंबर, चालक, कंडक्टर व स्कूल का नंबर लिखा हो।
बसों की पहली सीढ़ी की ऊंचाई 325 मिलीमीटर से ज्यादा न हो।
लो फ्लोर बस के साथ उसमें रेलिंग भी होनी चाहिए।
बसों की स्पीड 40 किमी प्रतिघंटा से अधिक नहीं होनी चाहिए।
रांग साइड में बस न रोकी जाए।
चालक, कंडक्टर नेमप्लेट, यूनिफार्म में हो।
ड्राइवर, कंडक्टर का हेल्थ चेकअप, आई चेकअप हो।
अब कसेगा जर्जर बसों पर शिकंजा
मेरठ। केंद्रीय मोटर-वाहन एक्ट में संशोधन होने के बाद बढ़ी फिटनेस पेनल्टी से जर्जर वाहनों पर शिकंजा कसने की संभावना बढ़ गई है। गत 6 जनवरी से संशोधित फीस व पेनल्टी लागू हो गई है। अब तक बसों की फिटनेस फीस 500 रुपये और देरी से फिटनेस कराने पर 400 रुपये की पेनल्टी लगती थी। लेकिन अब केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने फिटनेस फीस बढ़ाकर 800 रुपये और लेट होने पर प्रति दिन 50 रुपये पेनल्टी कर दी है।