उत्तर प्रदेश के बिजनौर में गांव सरकथल माधो के किसान कमलदीप सिंह ने विदेश में नौकरी को छोड़कर गांव में आकर मोतियों की खेती शुरू की है। तालाब में सीप में बनने वाले मोती देवी-देवताओं की मूर्ति जैसे होंगे। इन पर धर्मों के प्रतीक चिह्न भी बनाए जा सकते हैं। कमलदीप सिंह ने गांव में मोतियों की खेती के लिए दो तालाब बनाए हैं। एक तालाब से एक साल में दस हजार मोती निकलते हैं। एक मोती की कीमत 150 से 200 रुपये तक होती है।
किसान कमलदीप सिंह ओमान में कैचअप बनाने वाली एक कंपनी में प्रोडक्शन टीम में काम करते थे। वहां उन्होंने खेती की नवीनतम तकनीकें देखीं। गांव में तो किसान धान, गेहूं और गन्ने की ही खेती करते थे। कमलदीप सिंह ने कुछ नया करने का सोचा और नौकरी छोड़कर गांव आ गए। अपने खेतों में उन्होंने 60 गुणा 60 फीट के दो तालाब खुदवाए। हर तालाब में दस हजार सीप डालीं।
सीप डाले हुए छह महीने पूरे हो चुके हैं। साल भर में सीप में डाली गई मूर्ति के अनुसार मोती निकलेगा। इन मूर्तियों की बनावट देवी देवताओं की मूर्तियों जैसी होती है। इन मूर्तियों की बाजार में बहुत मांग होती है। एक एक मोती 150 से 200 रुपये तक का बिक जाता है। खासतौर से धार्मिक केंद्रों जैसे हरिद्वार, ऋषिकेश, चार धाम की यात्रा आदि वाली जगहों पर ये खूब बिकते हैं।