निराश्रित गोवंशों को मिल रहा गऊ प्रेमियों का सहारा
बिजनौर। जिन गोवंश को उनके मालिकों ने सड़कों पर निराश्रित छोड़ दिया था, उनकी देखभाल के लिए अब दूसरे किसान सामने आ रहे हैं। जिले की गोशालाओं से अब तक रिकॉर्ड 289 गोवंश गोद लिए जा चुके हैं। गोवंश गोद लेने संबंधी जानकारी लेने के लिए अब भी किसान गोशालाओं से संपर्क कर रहे हैं।
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से गोहत्या खत्म करने के लिए पुलिस ने बहुत सख्ती की। गोहत्या करने वालों ने गोवंश खरीदने कम कर दिए। परिणाम यह हुआ कि किसानों ने अपने बूढ़े गोवंश को सड़कों पर छोड़ना शुरू कर दिया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निराश्रित गोवंश को रखने के लिए नगर पालिकाओं व ब्लॉक को बजट दिया था। इसके बाद नगर पालिका व पंचायतों में मिलने वाले निराश्रित गोवंश को कान्हा पशु आश्रय स्थल व देहात में अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल बनाए गए। साथ ही प्रदेश सरकार ने घोषणा की थी कि गोवंश को गोद लेने वाले किसानों को उनके आहार के लिए प्रतिदिन 30 रुपये प्रति गोवंश दिए जाएंगे। एक किसान अधिकतम चार गोवंश गोद ले सकता है। इसके बाद गोवंश गोद लेने के लिए किसान आगे आ रहे हैं। जिले में 24 जुलाई तक जो गोवंश गोशालाओं में थे, उनमें से 278 गोवंश गोद देने का लक्ष्य जिले को दिया गया था। पशुपालन विभाग ने अब तक लक्ष्य के सापेक्ष 289 गोवंश को गोद दे दिया है।
अब भी गोद ले सकते हैं 476 पशु
जिले में 24 जुलाई तक 765 गोवंश संरक्षित थे। इनमे से 278 पशु गोद देने का लक्ष्य जिले को दिया गया था। पशुपालन विभाग के जरिए अब तक 289 पशु गोद दिए जा चुके हैं। बाकी बचे 476 पशुओं को भी गोद लिया जा सकता है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाक्टर भूपेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में गोवंश को गोद लेने के लिए किसानों में रुझान है। अब भी गोवंश गोद लिए जा सकते हैं।
यह है गोवंश गोद लेने की औपचारिकता
24 जुलाई से पहले गोशाला में संरक्षित गोवंश को ही गोद दिया जा सकता है। गोवंश गोद लेने वाला किसान या अन्य व्यक्ति संबंधित गोशाला के क्षेत्र का होना चाहिए। वह 100 रुपये के स्टांप पर गोवंश के भरण पोषण की व्यवस्था की जानकार देगा। गोद लिए गोवंश को बेचा या छोड़ा नहीं जा सकता है।
जिले की अमीनाबाद में बनी गोशाला
निराश्रित गायों को रखने के लिए स्योहारा ब्लॉक के गांव अमीनाबाद में बनाई गई अस्थायी गो आश्रय स्थल में पूरे प्रदेश के लिए मॉडल बन गई है। यहां गायों को चरने के लिए जंगल में भेजा जाता है और उनके स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। इसके सुखद परिणाम सामने आए हैं। गौशाला में 121 में से 65 गाय गर्भवती हैं। वर्तमान में किसी बड़ी डेरी में गायों की गर्भ धारण की इतनी क्षमता नहीं रह गई है। सबसे ज्यादा पशु यहीं से गोद दिए गए हैं।