संक्रमण कॉल में अपने-अपने घरों में वायरस से बचाव को लेकर कैद हुए व होम आइसोलेट मरीजों का मानसिक तनाव और उपचार करने में उक्त औषधीय पौधे बेहद कारगर हैं। ऐसे में क्षेत्र के अनेक लोगों ने अपने-अपने घर आंगनों और बगीचों में औषधीय पौधे रोपने शुरू कर दिए हैं। लोग इन पौधों का काढ़ा पीने व दवा के रूप में सेवन करने में लगे हुए हैं।
आयुर्वेदिक औषधि संजीवनी से कम नहीं
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. कृष्ण कुमार शर्मा बताते हैं कि औषधीय पौधों का काढ़ा बनाकर पीने और औषधि के रूप में सेवन करने से रोग प्रतिरोध क्षमता में बढ़ोतरी होती है। सीएससी प्रभारी डॉ. मदनपाल सिंह बताते हैं कि कोरोना कॉल में मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए पौधों पर लगने वाले फूलों की सुगंध सूंघने से मानसिक तनाव में राहत मिलती है।
निरंकार त्यागी, हेमंत त्यागी, सतीश त्यागी, अजय शर्मा, इकरामुद्दीन, सरदार मलखान सिंह, जंगबीर सिंह आदि लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने-अपने घरों के आंगन में कोरोना कॉल में विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधे लगाए हैं।
ऐसे में क्षेत्रीय नर्सरियों से इन पौधों की खूब खरीदारी की जा रही है। गांव शरीफपुर निवासी मुंगिया नर्सरी के संचालक यशपाल सिंह सैनी का कहना है कि कोरोना कॉल में उनकी नर्सरी में औषधीय पौधों की काफी बिक्री हुई है और तरह-तरह के औषधीय पौधे की मांग भी बढ़ी है।