मेरठ। सरकारी रिकाॅर्ड में भले ही रजबहे और माइनरों की सफाई हो चुकी है, लेकिन सच्चाई यह है कि अभी भी रजबहों में सिल्ट ही नहीं, बल्कि झाड़ियां भी खड़ी हैं। सफाई नहीं होने के बाद भी रजबहों में पानी छोड़ दिया गया है। जो किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले के कुछ रजबहे और माइनरों की सफाई होनी ही नहीं है, क्योंकि सरकार से उतना धन ही नहीं मिला है। बिजली बंबा यानी मेरठ माइनर और दौराला-सिवाया रजबहे की सफाई नहीं हुई है।
सरकार के निर्देश पर सिंचाई विभाग ने दशहरे से दीपावली तक सफाई के लिए गंगनहर बंद रखी। 15 दिसंबर तक भी रजबहे और माइनरों की सफाई की गई। विभाग का दावा है कि सरकार से मिले धन के अनुरूप गंगनहर से जुड़े माइनर और रजबहों की सफाई कराई गई है। अधिकतर रजबहे और माइनरों में टेल तक पानी पहुंच रहा है। शहर के निकट से गुजर रहे बिजली बंबा यानी मेरठ माइनर में झाडि़यां खड़ी हैं। सफाई किए बगैर ही रविवार को माइनर में पानी छोड़ दिया गया। दिल्ली रोड संजय वन से लगभग आधा किमी दूरी पर ही माइनर का पानी पटरी तोड़कर पूरे इलाके में फैल गया।
सभी रजबहे और माइनरों की नहीं होनी सफाई
अधिशासी अभियंता नीरज लांबा का कहना है कि सरकार से मिले बजट के मुताबिक रजबहों के जरूरी हिस्से का चयन कर सफाई कार्य की योजना बनाई थी। सभी रजबहे और माइनरों की सफाई नहीं होनी है। बिजली बंबा और दौराला-सिवाया रजबहे की भी सफाई नहीं की जाएगी।
रूहासा में चपसलावा रजबहे की पटरी टूटी
रजबहों की निगरानी में कमी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। कलंजरी में रजबहे की पटरी टूटे अभी तीन दिन ही बीते हैं कि सोमवार को रुहासा में चपसलावा रजबहे की पटरी टूट गई। सिंचाई विभाग ने दिनभर पटरी को ठीक करने का काम किया। उधर, रजबहे के पानी से किसानों की फसलें जलमग्न हो गईं।