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फूलपुर-गोरखपुर की हार के बाद कैराना में बड़ा मुकाबला, PM मोदी करेंगे सभा

Sun, 29 Apr 2018 11:34 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मदन बालियान, बागपत
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
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कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा का चुनावी कार्यक्रम घोषित होते ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सियासी तापमान चढ़ने लगा है। फूलपुर और गोरखपुर में चोट खाई भाजपा इस बार कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहेगी। इत्तेफाक कहें या भाजपा की सधी रणनीति उपचुनाव के मतदान से दो दिन पहले 26 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करेंगे और इस दौरान खेकड़ा में जनसभा होगी। वेस्ट यूपी के लिए कईं बड़ी घोषणाएं होंगी, जिनमें दिल्ली-सहारनपुर हाइवे का निर्माण भी शामिल है। 

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कैराना-नूरपुर का उपचुनाव 28 मई को होगा, मतगणना 31 मई को होनी है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव का एक मुद्दा कैराना से पलायन भी था। सपा-बसपा के गठबंधन ने फूलपुर-गोरखपुर में भाजपा को हराकर सियासत का नया गणित बनाया। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के दम पर भाजपा बसपा प्रत्याशी को रोकने में कामयाब रही, लेकिन असल इम्तिहान कैराना में ही होना है। 31 मई के नतीजे अगले लोकसभा चुनाव के लिए आधार जैसे होंगे। यही वजह है कि भाजपा कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहती। जाहिर है कि कैराना और नूरपुर के चुनाव में भाजपा अपनी पूरी ताकत झोंक देगी। वजह है कि बागपत की सभा से लोकसभा चुनाव के सियासी समीकरण बनेंगे और बिगड़ेंगे। भाजपा मात खा गई तो विपक्ष के महागठबंधन के फार्मूले के कामयाब होने का संदेश जाएगा।

पढ़ें : ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर बनेंगे आठ हाइवे नेस्ट, प्रधानमंत्री 29 को करेंगे उद्घाटन

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महागठबंधन नहीं बना तो त्रिकोणीय मुकाबला

मवी कलां में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर लगा फौव्वारा - फोटो : अमर उजाला
भाजपा के सामने विपक्ष महागठबंधन बनाकर चुनाव लड़ना चाहता है। लेकिन इसकी चॉबी सपा-बसपा के हाथ हैं। दोनों ने अभी तक कांग्रेस और रालोद को लेकर स्पष्ट बयान नहीं दिए हैं। अब सवाल सियासी गणित का है। महागठबंधन में कांग्रेस-रालोद शामिल नहीं हुए तो कैराना और नूरपुर में त्रिकोणीय मुकाबला होगा। भाजपा के सामने सपा-बसपा और कांग्रेस-रालोद चुनौती देंगे।
 
अभी उलझा हुआ है प्रत्याशियों की घोषणा का गणित
महागठबंधन में सीट रालोद के हिस्से आई तो कैराना से जयंत चौधरी चुनाव लड़ेंगे। लेकिन रालोद-कांग्रेस के गठबंधन चुनाव में उतरा तो जयंत मैदान में नहीं होंगे। इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष इमरान मसूद और शामली के पूर्व विधायक राजेश्वर बंसल, सपा बसपा गठबंधन प्रत्याशी के तौर पर पूर्व मंत्री एवं एमएलसी वीरेंद्र सिंह और पूर्व सांसद तब्बसुम भी मजबूत दावेदार हैं। भाजपा ने स्वर्गीय हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को प्रत्याशी घोषित किया है। रालोद के कुछ नेता जयंत चौधरी की पत्नी चारू चौधरी को भी उनके मुकाबले पर खड़ा करना चाहते हैं, लेकिन इस पर छोटे चौधरी ने सहमति नहीं जताई। शुक्रवार तक गठबंधन, महागठबंधन और प्रत्याशियों पर अंतिम फैसला होने की उम्मीद जताई जा रही है। बृहस्पतिवार को दिल्ली में रालोद के रणनीतिकारों ने मंथन किया है।

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