उल्देपुर गांव में संघर्ष के दौरान दलित छात्र रोहित की मौत होने की खबर जिले में आग की तरफ फैल गई। गुस्साए ग्रामीणों ने रोहित का शव गांव के बाहर आंबेडकर मूर्ति के पास रख दिया। इसकी सूचना पर भीम आर्मी के कार्यकर्ता भी गांव में पहुंचे तो पुलिस ने एक्शन मोड में आते हुए आरएएफ बुला ली।
उस समय परिवार की महिलाएं रोहित के शव से लिपटकर रो रही थीं। भीम आर्मी का एक कार्यकर्ता इसकी वीडियो बना रहा था। लोगों की भीड़ और हंगामा बढ़ता जा रहा था। आरएएफ के पहुंचते ही पुलिस भी हरकत में आ गई। पुलिस ने लाठी भांजकर भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं को दौड़ा लिया। परिजनों के विरोध के बावजूद रोहित के शव को उठाकर जीप में डालकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। हंगामा करने वाले पांच लोगों को पुलिस मौके से पकड़कर थाने ले गई।
बवाल होने का था अंदेशा
दलितों और सवर्णों में दलित छात्र की मौत होने पर बवाल होने का अंदेशा था। लेकिन पुलिस ने ऐन वक्त पर आरएएफ को साथ लेकर मोर्चा संभाल लिया। पुलिस ने लोगों को समझाया कि शव का पोस्टमार्टम हो जाने दो। उसके बाद पुलिस अगली कार्रवाई कर पाएगी। लेकिन गुस्साए लोग मानने को तैयार नहीं थे। उनकी मांग थी कि हत्यारोपी गिरफ्तार होंगे, उसके बाद शव उठने देंगे। जिस पर पुलिस को बलपूर्वक शव कब्जे में लेना पड़ा।
चार घंटे किया इंतजार
छात्र रोहित के चाचा योगेंद्र यूपी पुलिस में कांस्टेबल हैं। उनकी पोस्टिंग शामली में है। परिवार की मांग थी कि योगेंद्र के आने पर शव उठने देंगे। पुलिस ने चार घंटे तक इंतजार किया। योगेंद्र भी गांव में पहुंच गए। योगेंद्र अपने भाई देवेंद्र से लिपटकर खूब रोए। उसके बावजूद भी शव नहीं उठा। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने भीड़ को खदेड़ना शुरू कर दिया।
राजनीति मत करो, बवाल नहीं होने दूंगा
सीओ सदर देहात जितेंद्र कुमार सरगम ने लाठी भांजने से पहले भीड़ से कहा कि राजनीति मत करो। किसी भी सूरत में बवाल नहीं होने दूंगा। कई लोग इस मामले को तूल देने की कोशिश कर रहे हैं। आरएएफ आई तो सीओ ने लोगों को खदेड़ा।