भाजपा में संगठन चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन इस बार चुनाव नए परिसीमन पर होगा। ऐसे में महानगर में जहां अब तक 16 मंडल रहते आए थे, वहां अब नौ से दस ही मंडल रहेंगे। लेकिन इस परिसीमन को लेकर आम सहमति नहीं बन पा रही है। इस पर महानगर भाजपा दो खेमों में बंट चुकी है।
वर्तमान में भाजपा महानगर में 16 मंडल हैं। इनमें सात मंडल कैंट विधान सभा, पांच मंडल शहर विधानसभा और चार मंडल दक्षिण विधानसभा में हैं। पुरानी व्यवस्था पर अगर गौर करें तो वार्ड स्तर पर निर्वाचित अध्यक्ष और प्रतिनिधि अपने मंडल का अध्यक्ष और प्रतिनिधि चुनते हैं। इसके बाद मंडल अध्यक्ष और प्रतिनिधि महानगर अध्यक्ष का चुनाव करते हैं और बाद में महानगर अध्यक्ष प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन में वोट डालते हैं।
लेकिन इस बार व्यवस्था तो यही रहेगी, लेकिन मंडलों का दोबारा परिसीमन हो रहा है। जिसके तहत वार्ड नहीं बल्कि बूथ स्तर पर मंडल गठित करने का आदेश राष्ट्रीय नेतृत्व से आया है। इसके तहत 90 से 100 बूथ को जोड़कर एक मंडल तैयार किया जाएगा। इस स्थिति में अगर कैंट विधानसभा पर नजर डालें तो वहां कैंट के एक अलग मंडल के साथ चार मंडल तैयार होते हैं। जबकि दक्षिण में इन मंडलों की संख्या पांच बैठती है।
चूंकि दक्षिण का एक हिस्सा देहात में आता है, इसलिए महानगर के लिए उसके तीन ही मंडल बनते हैं। इन सबके बीच शहर विधानसभा क्षेत्र की स्थिति सबसे अलग है। शहर विधानसभा क्षेत्र में 303 बूथ हैं, लेकिन इनमें से 127 बूथ मुस्लिम बहुल क्षेत्र में होने से यहां भाजपा सक्रिय नहीं है। इसलिए सवाल उठ रहा है कि यहां पर कोई मंडल तैयार नहीं होना चाहिए। ऐसी स्थिति में शहर विधानसभा में दो मंडल ही बनते हैं। यदि बहुत जोर लगाया जाए तो इनकी संख्या बढ़कर तीन हो सकती है।
कोर कमेटी की नए परिसीमन को लेकर दो बार बैठक हो चुकी है, लेकिन इनमें कोई सहमति नहीं बन पाई है। वर्तमान महानगर अध्यक्ष जहां सभी में बराबर वार्ड की मशक्कत कर रहे हैं, तो कैंट विधायक उनका विरोध कर रहे हैं। इन सबके बीच दक्षिण विधायक रविंद्र भड़ाना जहां महानगर अध्यक्ष सुरेश जैन रितुराज जो कि प्रदेश अध्यक्ष खेमे से हैं, उनके साथ खड़े नजर आ रहे हैं, तो कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल और सांसद राजेंद्र अग्रवाल अलग खेमे में खड़े हैं। इस खेमाबंदी के बीच अभी तक परिसीमन नहीं हो पाया है।
जबकि प्रदेश नेतृत्व का निर्देश है कि महानगर अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष का चुनाव 10 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाए। ऐसे में 15 नवंबर तक नए परिसीमन को तैयार कर चुनावी तैयारी शुरू होनी है, लेकिन अभी तक परिसीमन पर बात बनती नजर नहीं आ रही है।