चौधरी चरण सिंह से जुड़ा एक किस्सा
ऐसा ही एक अनसुना किस्सा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण का रोहटा ब्लॉक के गांव रासना से जुड़ा है। बता दें कि 17 स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारियों की कर्मस्थली रही रासना गांव से चौधरी चरण सिंह को खास लगाव था। वह देश की आजादी के लिए महान क्रांतिकारियों के चरण इस पावनी धरती पर पड़ने के कारण आसपास के ग्रामीणाों को भी सम्मान की नजर से देखते थे।
ओम प्रकाश त्यागी चरण सिंह से थे प्रभावित
वहीं, गांव रसना निवासी न्यादर सिंह नंबरदार का चौधरी चरण सिंह से बहुत करीबी रिश्ते रहे, दोनों की मित्रता थी। पूर्व एमएलसी ओमप्रकाश त्यागी के पुत्र प्रदीप त्यागी ने बताया कि चौधरी चरण सिंह ने जब बीकेडी पार्टी बनाई तो न्यादर सिंह नंबरदार के पुत्र ओम प्रकाश त्यागी कांग्रेस में थे। वर्ष 1971 में कांग्रेस से बागपत लोकसभा से चुनाव भी लड़ा, परंतु वर्ष 1972 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और चौधरी साहब के साथ बीकेडी पार्टी में आने का निर्णय लिया।
इसके खास आयोजन के लिए एक विशाल जनसभा मेरठ बड़ौत रोड आश्रम चौराहे पर रखी गई। बड़ा समारोह हुआ परंतु न्यादर सिंह सभा में नहीं गए थे। चौधरी साहब ने ओमप्रकाश त्यागी से पूछा कि तुम्हारे पिताजी कहां हैं? सभा में नहीं आए हैं क्या?
परिवार बहुत महत्वपूर्ण स्तंभ: चौधरी चरण सिंह
बताया गया कि वह घर पर ही है, चौधरी साहब ने कहा कि जब तक नंबरदार जी सभा में नहीं आएंगे और अपनी स्वीकृति नहीं देंगे मैं तुझे पार्टी ज्वाइन नहीं कराऊंगा। तभी उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा कि पार्टी या कोई संगठन की अपनी भूमिका है। लेकिन एक परिवार बहुत महत्वपूर्ण स्तंभ है जो कि पार्टी से बड़ा और सम्मानीय होता है। इसीलिए परिवार को संगठित करना हमारा कर्तव्य और नैतिक संस्कार है। जब पूर्व प्रधानमंत्री ने बिना परिवार की स्वीकृति के पार्टी के सदस्यता मना किया तो उनकी नसीहत देते हुए संस्कार को जीवन में उतारने का संदेश दिया।
भारत रत्न मिलने पर किसान मजदूर हर्षित
तभी न्यादर सिंह सभा में आए और चौधरी साहब ने ओमप्रकाश त्यागी को पार्टी ज्वाइन कराई और वर्ष 1974 में ओमप्रकाश त्यागी बीकेडी से लोकल बॉडी मेरठ मुज्जाफानगर क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य चुने गए। ऐसे ही रूबरू होने और आम जनता से खुलकर बात करने वाले किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह को देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न मिला तो आसपास के किसान मजदूर हर्षित हैं।