शहर का सबसे व्यस्त रहने वाला क्षेत्र बेगमपुल से भैसाली बस अड्डा इन दिनों यात्रियों के लिए सुविधा कम और दहशत का सबब ज्यादा बन गया है। रोडवेज बसें, ई-रिक्शा और अवैध डग्गामार वाहनों के जानलेवा त्रिकोण ने इस मुख्य मार्ग को हादसों के गलियारे में तब्दील कर दिया है। पिछले तीन महीने में यहां दो लोगों की मौत हो गई है और कई लोग घायल हो गए हैं लेकिन इसके बावजूद बस अड्डे के बाहर का नजारा प्रशासन के उन दावों की पोल खोलता है जिनमें यातायात सुधार की बात कही जाती है।
कायदे से रोडवेज बसों को डिपो के अंदर खड़ा होना चाहिए लेकिन दर्जनों बसें आधी सड़क घेरकर खड़ी रहती हैं। बाकी कसर ई-रिक्शा और टेंपो चालक पूरी कर देते हैं जो सवारियों के लालच में बीच सड़क पर ही अवैध स्टॉप बना लेते हैं। दिल्ली रोड पर सुबह से शाम तक अतिक्रमण के कारण पैदल चलना भी दूभर है। सड़क किनारे फल, चाट और खाने के ठेले अवैध रूप से सजे रहते हैं। यदि कोई राहगीर ई-रिक्शा या टेंपो चालक को वाहन हटाने के लिए कहता है तो वे झगड़े पर उतारू हो जाते हैं।
नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति करते दिखते हैं। मानक के अनुसार भारी वाहनों के आवागमन वाली सड़क कम से कम 20 मीटर चौड़ी होनी चाहिए लेकिन अतिक्रमण के चलते यहां मात्र 10 मीटर जगह ही शेष बचती है।
पिछले हादसों पर एक नजर
16 दिसंबर: कंकरखेड़ा के श्रद्धापुरी निवासी 11वीं की छात्रा अक्सा (17 वर्ष) स्कूटी से स्कूल जा रही थी। ई-रिक्शा से बचने के प्रयास में वह रोडवेज बस की चपेट में आ गई और मौके पर ही उसकी जान चली गई।
12 नवंबर: हस्तिनापुर निवासी अतर सिंह किसी काम से मेरठ आए थे। घर लौटने के लिए सवारी का इंतजार करते समय रोडवेज बस ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
07 नवंबर: सदर बाजार निवासी अंकित बाइक से घर का सामान लेकर जा रहे थे। रोडवेज बस की चपेट में आने से उनके पैर में गंभीर चोट आई और वे बुरी तरह घायल हुए।
अधिकारियों का आश्वासन
रविवार से दिल्ली रोड पर अवैध टेंपो और ई-रिक्शा स्टैंड के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा। सड़क पर अतिक्रमण करने वालों और अवैध वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कागजी कार्रवाई की जाएगी। यातायात व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। — राघवेंद्र मिश्रा, एसपी ट्रैफिक