वर्ष 2005 के आसपास यहां स्वर्ण छत्र और स्वर्ण कलश की स्थापना हुई। इसके बाद भैरव बाबा के शृंगार के लिए स्वर्ण, हीरे और अन्य रत्न जड़ित आभूषण आदि तैयार किए गए। सराफा व्यापारियों सहित आसपास के धर्म प्रेमियों ने अपनी श्रद्धा अनुसार दान किया। आज बाबा का 2.5 करोड़ के आभूषणों से शृंगार होता है। मंदिर में भैरव बाबा की तीन मूर्ति हैं। मुख्य विग्रह को कोई नहीं छू सकता। 1980 के आसपास शोभायात्रा के लिए अष्टधातु की मूर्ति बनारस से मंगवाई थी। इसके साथ ही प्रभात फेरी के लिए एक अन्य छोटी मूर्ति हैं।
एक घंटे में होती है एक साल की बुकिंग
मंदिर में प्रति शनिवार को भैरव बाबा का विशेष शृंगार किया जाता है। आदित्य शारदा और राजीव कुमार माहेश्वरी ने बताया कि प्रत्येक वर्ष मार्च माह के अंतिम शनिवार को मंदिर में शृंगार के लिए बुकिंग खोली जाती है। एक घंटेे में ही बुकिंग फुल हो जाती है। प्रत्येक शनिवार को भैरव बाबा की पोशाक बदली जाती है। फूलों का शृंगार होता है। साथ ही विशेष पूजा अर्चना होती है।
कार्यक्रम हुए आरंभ
भैरव बाबा मंदिर में ध्वजारोहण के साथ कार्यक्रम आरंभ हुए। इसका सौभाग्य नकुल सेन, सरजू कुमार जौहरी को प्राप्त हुआ। अखंड दीप प्रज्ज्वलित मनोज कुमार ने किया। हवन कोमल रस्तौगी और राज किशोर रस्तौगी ने किया। पट उद्घाटन का सौभाग्य राजेंद्र कुमार और राजीव कुमार माहेश्वरी को प्राप्त हुआ। सूर्योदय के साथ ही मंदिर से विशाल प्रभातफेरी निकाली गई। बजाजा, सराय लाल दास, वैली बाजार, नील गली आदि स्थानों से गुजारी। नील गली और सराय लाल दास में यात्रा का स्वागत हुआ। महिलाओं ने विशेष पूजा अर्चना की। इस दौरान शिवकुमार सिंघल, विशाल रस्तौगी, रमेश चंद्र राणा, राजीव, विशाल राठी, सतेंद्र जैन, गौरव शारदा, आदित्य शारदा, सुमित अग्रवाल मौजूद रहे।