त्यागी कल्याण समिति के तत्वाधान में राजवंश भवन डी ब्लॉक शास्त्रीनगर में रविवार दोपहर को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन समिति अध्यक्ष उदयवीर त्यागी ने अपनी चाची चमेली देवी और चाचा धर्मवीर सिंह त्यागी की स्मृति में कराया। सम्मेलन का संयोजन राधेश्याम त्यागी और अध्यक्षता वरिष्ठ कवि बिजेंद्र सिंह ‘परवाज’ ने की। मुख्य अतिथि रिटायर डीएसपी तपेश्वर दयाल त्यागी और उद्योगपति उमेश त्यागी रहे। कवि सम्मेलन का संचालन कवयित्री शुभम त्यागी ने किया।
इस मौके पर कवि चरण सिंह स्वामी ने कविता सुनाई कि ‘हम कितना दर्द लिए फिरते हैं अपने-अपने सीने में, शेर कहां अब रहां पर मरने औरर जीने में’। नादां मेरठी ने कहा कि ‘वो फेंकता रहा अल्फाज के पत्थर मुझ पर, मैं टूटता ही रहा रोज आइनों की तरह’। साहिबाबाद से आए बीके वर्मा शौदी ने सुनाया कि ‘ऐ दोस्त, हम उस बात के कायल ही नहीं हैं, जो बात सलीके से अदा हो नहीं सकती’।
वहीं नंदिनी हर्ष ने कविता सुनाई कि ‘नहीं सूरत बनी ऐसी हमीं को छीन ले हमसे, हमारे दिन के सब निर्णय हमारे ही हवाले हैं’। बिजेंद्र परवाज ने सुनाया कि ‘तेरे प्यार की प्यास किसको नहीं है, किसे साथ लेगा किसे छोड़ देगा’। कवयित्री शुभम त्यागी ने कविता सुनाई कि ‘श्रद्घा सुमन अर्पित कर लें आओ मिलकर हम, साथ नहीं कुछ जाता है, कर्म यहां रह जाता है’। संजीव त्यागी ने पाठ किया कि ‘नेताजी के शब्दों का सम्मान करते हैं, भगत सिंह वाला फिर दिल में हम तूफान रखते हैं, सरहद पर दुश्मनों की मौत का सामान हैं हम भी, कफन सिर पर और दिल में हिंदुस्तान रखते हैं’। इसके अलावा अशोक पंकज, नरेंद्र कुमार त्यागी ठठेरा और राधेश्याम त्यागी ने भी काव्य पाठ किया।