खादर क्षेत्र में गंगा के किनारे शनिवार सुबह परीक्षितगढ़ पुलिस ने आबकारी टीम के साथ अवैध शराब के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया। भारी संख्या में पुलिस फोर्स को देखकर अवैध रूप से शराब बनाने वाले लोगों में अफरातफरी मच गई। जिसके बाद शराब माफिया नाव के माध्यम से गंगा को पार कर गए और पुलिस किनारे पर खड़ी हुई देखती रह गई। बाद में पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर बीस से अधिक बड़ी भट्टियों को तोड़ते हुए दो हजार लीटर शराब बरामद की है।
पिछले कई दिनों से पुलिस को परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र में गंगा के किनारे अवैध तरीके से कच्ची शराब बनने की शिकायत मिल रही थीं। शनिवार सुबह एसपी देहात श्रवण कुमार ने एसओ परीक्षितगढ़ को शराब माफियाओं पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। जिसके बाद एसओ परीक्षितगढ़ ओमप्रकाश सिंह और आबकारी विभाग की टीम परीक्षितगढ़ क्षेत्र के मिर्जापुर में पहुंची। जैसे ही पुलिस की गाड़ियां गंगा से कुछ दूरी पर रुकीं तो शराब माफिया ड्रम और कच्ची शराब छोड़कर गंगा किनारे खड़ी नाव से भाग निकले।
एसओ समेत अन्य पुलिस कर्मी दौड़कर गंगा किनारे पहुंचे तो शराब माफिया अपनी नाव गंगा में उतार चुके थे। पुलिस ताकती रह गई और देखते ही देखते माफिया नाव से गंगा पार कर गए। इसके बाद पुलिस ने कुंडा, खरकारी गांवों में भी गंगा किनारे अवैध शराब की भट्टियों को तोड़ दिया। एसओ परीक्षितगढ़ ने बताया कि अलग-अलग स्थानों पर बीस से अधिक भट्टियों को तोड़ा गया है। मौके से दो हजार लीटर अवैध शराब बरामद की है। जबकि भारी मात्रा में कच्ची शराब को नष्ट कर दिया। कुछ लोगों को चिह्नित किया गया है, जिनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
ऐसे बन रही थी शराब
एसओ परीक्षितगढ़ ने बताया कि गंगा किनारे बड़े ड्रम और बैरल को भट्टी पर रखकर सड़े हुए गुड़ और यूरिया से कच्ची शराब बनाई जा रही थी। जिसमें पानी में गुड़ घोलने के बाद उसमें यूरिया मिलाया जा रहा था। इसे शराब का रूप देने के लिए कुछ अल्कोहल भी मिलाया जा रहा था। जिन्हें 15-20 लीटर के ड्रमों में भरकर गांवों में ले जाया जाता है। वहां से बोतल और पव्वों में भरकर बेचा जाता है।
तैयार रहती हैं नाव
पुलिस का कहना है कि गंगा के किनारे रेत में कच्ची शराब के लिए भट्टी लगाते हैं। भट्टी में कोयला और लकड़ी का प्रयोग करते हैं। गांव में अपने मुखबिर रखते हैं ताकि पुलिस या आबकारी टीम के पहुंचने का पता चल सके। पुलिस के पहुंचने से पहले ही ये शराब माफिया नाव में सवार होकर गंगा के दूसरे पार पहुंच जाते हैं। भट्टी भी गहरे पानी के पास बनाते हैं जिससे पुलिस गंगा में कूदने का प्रयास न करे।