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भारी वाहन बंद होने से सुधार की ओर ट्रैफिक व्यवस्था  

Wed, 03 Jan 2018 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : meerut
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शहर में भारी वाहन बंद होने से जहां यातायात व्यवस्था सुधार की ओर है तो जाम से काफी हद तक निजात मिल रही है। मुख्य चौराहों पर भी जाम की समस्या का समाधान हो रहा है। शहर की सड़कों पर दिन में ट्रकों से जाम लगता था। अब चौराहे और सड़क खाली-खाली सी लगती हैं। वहीं, ट्रांसपोर्टर शहर में भारी वाहन बंद होने का विरोध कर रहे हैं।
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शहर में सुबह सात बजे से रात्रि दस बजे तक नो एंट्री का समय है। नो एंट्री के समय शहर में भारी वाहन प्रतिबंधित किए गए हैं। शहर में भीड़भाड़ वाले स्थानों और मुख्य चौराहों पर ट्रकों से दिन में हादसे होते थे। यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारियों के निर्देश पर 25 दिसंबर की सुबह से एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेई ने नो एंट्री के समय भारी वाहनों को प्रतिबंध कर दिया था। बाद में ट्रांसपोर्टरों ने अपनी समस्या रखी तो एसएसपी और एसपी ट्रैफिक ने टीपी नगर तक भारी वाहनों को आने की छूट दी। लेकिन दोपहर एक बजे से तीन बजे और शाम पांच से आठ बजे तक भारी वाहनों का समय ट्रांसपोर्ट नगर तक प्रतिबंधित रखा गया था।
भारी वाहन बंद होते ही रुड़की रोड, जीरो माइल चौराहा, लालकुर्ती मुख्य मार्ग, बाउंड्री रोड, कमिश्नर आवास चौराहा, विश्व विद्यालय रोड, जेल चुंगी चौराहा, तेजगढ़ी चौराहा, मेडिकल कॉलेज  गेट, शास्त्रीनगर में पीवीएस रोड, एल ब्लॉक तिराहा, के अलावा मेट्रो प्लाजा और दिल्ली रोड पर  भी जाम से छुटकारा मिलने के साथ व्यवस्था में सुधार हुआ है।
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एसएसपी से मिले ट्रांसपोर्टर
मेरठ। ट्रांसपोर्ट  एसोसिएशन के अध्यक्ष गौरव शर्मा के नेतृत्व में मंगलवार शाम ट्रांसपोर्टर मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल में एसएसपी और एसपी ट्रैफिक से मिले।
गौरव शर्मा ने ज्ञापन देते हुए कहा कि ट्रैफिक पुलिस को भारी वाहनों से ही जाम नजर आता है। जबकि ई-रिक्शा और ऑटो से भी जाम लगता है। ट्रक शहर में बंद किए गए हैं, ऐसा ही प्रयोग दस दिनों के लिए रोडवेज बसों का भी होना चाहिए। ट्रांसपोर्टरों का उत्पीड़न हो रहा है उन्हें अपने ट्रक फिटनेस के लिए आरटीओ में ले जाने पड़ते हैं। साथ ही शहर में अन्य स्थानों पर माल जाता है। जाम के लिए डिवाइडर कट बंद होने चाहिए। अतिक्रमण हटे। भैसाली और सोहराब गेट बस अड्डा भी शहर से बाहर होने चाहिए। एमडीए की महायोजना 2021 में भी दोनों बस अड्डों का शहर से बाहर होने का प्रस्ताव है। बस अड्डों को बाहर करने के लिए काम नहीं किया जा रहा। शहर में जहां भी दिन के समय ट्रैफिक पुलिस ने ट्रकों की पाबंदी लगाई है वह सही नहीं है। ट्रांसपोर्टरों की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो छह जनवरी को ट्रांसपोर्टर मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी समस्या रखेंगे। ट्रांसपोर्टर हड़ताल से भी पीछे नहीं हटेंगे। एसएसपी मंजिल सैनी दहल ने ट्रांसपोर्टरों को बुधवार का समय दिया है।

यह निर्णय सही
सच संस्था के अध्यक्ष डॉ. संदीप पहल का कहना है कि दिन में नो एंट्री के समय भारी वाहन प्रतिबंधित रहते हैं। ट्रैफिक पुलिस ने भारी वाहन बंद कर सही काम किया है। जब से भारी वाहन बंद हुए हैं, यातायात व्यवस्था में सुधार हुआ है। भारी वाहनों से ही दिन में जाम लगता था। शहर के लोगों को ट्रैफिक पुलिस का सहयोग करना चाहिए। शहर में दिन के समय आए दिन भारी वाहनों से हादसे होते थे। आए दिन शहर जाम से जूझता था जब से भारी वाहन बंद हुए हैं चौराहों पर जाम से भी निजात मिली है।

यह अच्छा कदम
पहल एक प्रयास के संस्थापक सदस्य डॉ. विश्वजीत बैंबी ने बताया कि अगर हम देखते हैं कि छोटे वाहनों को जगह ही नहीं मिली तो उसका कारण भारी वाहन थे। ट्रैफिक पुलिस ने व्यवस्था सही करने के लिए अच्छा कदम उठाया है। ई-रिक्शा और ऑटो का भी प्लान बनाना चाहिए। हादसे भी ट्रकों से होते थे। नो एंट्री के समय शहर में भारी वाहनों पर रोक और भी पहले लगाई जानी चाहिए थी।

सभी का सहयोग चाहिए  
मिशिका सोसायटी के अध्यक्ष अमित नागर का कहना है कि यातायात व्यवस्था सभी के सहयोग से सुधरेगी। ट्रांसपोर्टरों को पुलिस का सहयोग करना चाहिए। टीपीनगर और मंडी तक दिन में भारी वाहन आने की छूट दी गई है तो शहर में क्यों ले जाना चाहते हैं। दिन में सड़क हादसों की जिम्मेदारी कौन लेगा। संस्था की तरफ से रोड सेफ्टी का कैलेंडर भी लांच किया जा रहा है। 
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