ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं के बीच एमआरपी का ‘खेल’ खेला जा रहा है और इसका खामियाजा मरीज भुगत रहे हैं। दरअसल, जेनेरिक दवाइयां भी ब्रांडेड के दामों पर ही बेची जा रही हैं। चौंकाने वाली बात यह भी है कि कई जेनेरिक दवाइयां तो ब्रांडेड से भी महंगी हैं। यह सब दवा कंपनियों और विक्रेताओं की सेटिंग से चल रहा है। यही वजह है कि सरकार की सख्ती और डॉक्टरों के जेनेरिक दवाएं लिखने के बावजूद इसका फायदा मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
दवा कारोबार पर नजर
ब्रांडेड व जेनेरिक दोनों ही दवाएं मल्टीनेशनल कंपनियां बना रही हैं। इनकी एमआरपी में कोई खास अंतर नहीं है। एक अनुमान के मुताबिक देश में ब्रांडेड दवाओं का कारोबार करीब तीन लाख 20 हजार करोड़ तो जेनेरिक दवाओं का 70 हजार करोड़ के आसपास है। मेरठ में रिटेल और होलसेल के मिलाकर करीब 32 सौ मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस हैं। इनमें करीब 350 लाइसेंस तो खैरनगर के दवा बाजार में हैं। शहर में रोजाना करीब तीन करोड़ से ज्यादा का दवा कारोबार होता है, जो माह में करीब एक अरब रुपये के आसपास पहुंच जाता है।
खेल तो यहां है
पैरासिटामॉल हो या आयरन-कैल्शियम, सभी दवाओं में ये खेल हो रहा है। मेरठ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल कहते हैं कि जेनेरिक दवाएं भी अलग-अलग कंपनियां अलग-अलग कीमत में बेचती हैं। इसके लिए अगर सरकार कीमत के हिसाब से उनकी एमआरपी तय करेगी, तो ही इसका लाभ होगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को चाहिए कि वह जेनेरिक दवाओं के डिब्बों पर अत्यधिक मूल्य न छापे जाने का आदेश जारी करे, तभी इसका फायदा मिल सकता है। वहीं, आईएमए के अध्यक्ष डॉ. वीरोत्तम तोमर का कहना है कि मरीजों को सस्ती दवा मिलनी चाहिए। साथ ही गुणवत्ता भी बेहतर होनी चाहिए।
दवाओं के तुलनात्मक रेट
ब्रांडेड जेनेरिक जेनेरिक होलसेल
दवाई (साल्ट) कीमत (रुपये में) कीमत (रुपये में) में कीमत (रुपये में)
सेफोटेक्सिम 139 290 80
सेफटिरियाऑक्सिन (1000 एमजी) 58 78 22
मेटफोरमिन 16 14 05
एंटी कोल्ड 31 30 10
डाइक्लोपैरा 21 25 05
कैल्शियम 64 56 10
ऑफलोक्सासिन 37 55 15
इटराकोनजॉल 88 80 20
कफ सिरप 57 74 10
ग्लिमपराइड 58 34 12
कैल्शियम पाउच 36 29 10
मल्टीविटामिन 100 85 20
(अधिकांश दवाओं की स्ट्रिप में 10 टेबलेट हैं। ये दवाएं शुगर, दर्द, जुकाम, एलर्जी आदि की हैं।)
ये होती हैं जेनेरिक दवाएं
किसी एक बीमारी के लिए तमाम शोध के बाद एक रासायनिक यौगिक को विशेष दवा के रूप में देने की संस्तुति की जाती है। इस यौगिक को अलग-अलग कंपनियां अलग-अलग नामों से बेचती हैं। जेनेरिक दवाइयों का नाम उसमें उपस्थित सक्रिय यौगिक के नाम के आधार पर एक विशेषज्ञ समिति निर्धारित करती है। किसी भी दवा का जेनेरिक नाम पूरे विश्व में एक ही होता है।