मेरठ में सरकार की तरफ से जरूरतमंद लोगों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। पात्र आवेदक कभी अफसरों की लापरवाही से परेशान रहते हैं तो कभी तकनीकी कारणों से। पहले वेबसाइट का सर्वर ठप रहा और अब तहसील में आवेदन का सत्यापन नहीं होने से लोगों का इंतजार लंबा होता जा रहा है। ऐसे में योजनाओं का लाभ लेने में लाभार्थियों को पसीने आ रहे हैं। हालात ये हैं कि तहसील में एक हजार आवेदन सत्यापन के लिए लंबित हैं। इनमें दिव्यांग, विधवा, वृद्ध पेंशन आदि शामिल हैं।
बीते छह माह से आवेदक परेशान हैं। पहले वेबसाइट का सर्वर कई दिनों तक ठप रहा। वहीं, अब तहसील में आवेदनों के लंबित होने से सरकारी योजनाओें का दम निकल रहा है। योजनाओं का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होता है। इसके बाद क्षेत्र के संबंधित लेखपाल के पास ऑनलाइन माध्यम से आवेदन भेजकर सत्यापन कराया जाता है।
दो लेखपाल को दिया सत्यापन का जिम्मा
शहरी क्षेत्र के आवेदकों के सत्यापन के लिए तहसील में मात्र दो लेखपाल को इस काम का जिम्मा दिया गया है। एक माह में हजारों आवेदन सत्यापन के लिए आते हैं। यह भी एक कारण है कि आवेदकों के आवेदन सत्यापन होने में देरी हो जाती है। हालांकि, अधिकतम 30 दिन में किसी योजना के आवेदक का आवेदन सत्यापित नहीं किया जाता है तो वह स्वत: ही सत्यापित माना जाएगा।
शादी अनुदान के आवेदन अटके
दिव्यांग पेंशन के आवेदनों का सत्यापन नहीं हो सका है। बीते माह शादी अनुदान योजना के करीब 300 से ज्यादा आवेदन भी अटके हुए हैं। वहीं, विधवा पेंशन के सत्यापन के 600 से अधिक आवेदन एसडीएम पोर्टल पर लंबित हैं। इस मामले में खुद सीडीओ ने पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी को पत्र लिखकर जल्द सत्यापन कराने के लिए कहा था।
ये चल रही हैं योजनाएं
वृद्धावस्था पेंशन, पारिवारिक लाभ योजना, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, शादी अनुदान आदि योजनाएं प्रमुख हैं।
काम जल्द निपटाने के लिए अतिरिक्त लेखपालों को सत्यापन में लगा दिया है। पहले की तुलना में काम तेजी से किया जा रहा है। हमारे पास पीएम किसान योजना जैसे कार्य भी चल रहे हैं। इस वजह से कुछ देरी हो रही है। -संतोष कुमार, सदर तहसीलदार