मेरठ मेें की गई खतौली के सुबोध शर्मा की हत्या का राज प्रॉपर्टी और ड्रग्स के धंधे में छिपा है। इस हत्या में हुई नामजदगी इसी तरफ इशारे कर रही है। मृतक की जिनसे नजदीकियां थी, उन्हें भी हत्या का मुजरिम बनाया गया है। मेरठ विजिलेंस टीम ने सुबोध की शिकायत पर ही 27 जनवरी को जिले के औषधि निरीक्षक राजेश कुमार यादव को कलक्ट्रेट में रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। वहीं वारदात के बाद से सभी नामजद आरोपी भूमिगत हैं।
खतौली के मोहल्ला देवीदास निवासी सुबोध शर्मा की हत्या के आरोपी खतौली के सुधीर शर्मा और औषधि लिपिक धर्मेंद्र कुमार से मित्रता थी। शनिवार रात मेरठ में सुधीर शर्मा की भतीजी की शादी में सुबोध अपने बेटे प्रभव और बेटी अराध्या के साथ पहुंचा था। उसी शादी में बाबू धर्मेंद्र भी शरीक हुआ था। पिछले एक साल में ड्रग्स विभाग में सुबोध की आवाजाही बढ़ी थी। सुबोध ने ओम साईं मेडिकोज के होलसेल के लाइसेंस के लिए नौ मार्च 2016 को औषधि निरीक्षक कार्यालय में आवेदन किया था। उसने लाइसेंस की एवज में 1.30 लाख की घूस ड्रग्स इंस्पेक्टर द्वारा मांगने की शिकायत 10 जनवरी को एसपी सतर्कता अधिष्ठान मेरठ सेक्टर से की थी। सुबोध की शिकायत पर 27 जनवरी को सीओ डॉ. राजीव कुमार के निर्देशन में विजिलेंस टीम ने कलक्ट्रेट में डीआई राजेश कुमार यादव को 50 हजार की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। सिविल लाइन थाने में दर्ज मामले में डीआई और सुभाष चंद्र को नामजद किया था।
ढाई माह मेरठ जेल में रहे दोनों आरोपियों की जमानत हो चुकी है। फिलहाल डीआई यादव खाद्य औषधि प्रशासन लखनऊ निदेशालय से संबद्ध है। अन्य दो आरोपियों राजबीर सिंह उर्फ टीटू और दीपक बंसल के बीच जमीन का विवाद और लेनदेन के मुद्दे उलझे रहे हैं। खतौली कोतवाली के रिकार्ड के मुताबिक मृतक के खिलाफ एक दर्जन से ज्यादा प्रॉपर्टी के मुकदमे दर्ज हैं।फिलहाल पुलिस नामजदों की तलाश में दबिश दे रही है। मूल रूप से मैनपुरी निवासी डीआई यादव भी पुलिस को अपने ठिकाने पर नहीं मिले हैं। उनके फोन सर्विलांस पर लगाए गए हैं।
मैरिज वीडियो और काल डिटेल खंगाली
मेरठ हाईवे स्थित नारायण फार्म हाउस में हुई शादी में सुबोध शर्मा की वीडियो और कॉल डिटेल के जरिए पुलिस हत्यारों तक पहुंच सकती है। दवा कारोबारी खतौली निवासी सुधीर शर्मा की भतीजी की शादी में ड्रग्स विभाग के अफसर और व्यापारी जुटे थे। कातिलों का मकसद केवल सुबोध की हत्या करना था। उन्हें उसकी पल-पल की खबर थी। कहीं ऐसा तो नहीं कि हत्यारे भी मैरिज मंडप में ही हों, या फिर मंडप की पार्किंग में पहले से उसके आने का इंतजार कर रहे हों।
तीन माह से बंद है डीआई कार्यालय
डीआई रिश्वत प्रकरण के बाद कलक्ट्रेट में औषधि निरीक्षक के कार्यालय पर तीन माह से ताला लगा है। शासन ने किसी नए निरीक्षक की नियुक्ति नहीं की है। सहारनपुर की डीआई अनामिका जैन को जिले का अतिरिक्त चार्ज दिया गया था। लेकिन अभी तक उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। थोक और फुटकर लाइसेंस की पत्रावलियां लंबित पड़ी हैं। आरोपी लिपिक धर्मेंद्र कुमार पिछले दो दशक से ड्रग्स विभाग के मुजफ्फरनगर कार्यालय में तैनात है। अखिलेश सरकार में उसकी शिकायत हुई थी, लेकिन हाईकोर्ट के स्टे के आधार पर वह कुर्सी बचाने में कामयाब रहा।