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मन्नत के बदले मौत ले गई विशू को  

Thu, 04 May 2017 02:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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 22 साल का विशू नौकरी के लिए गंगोत्री मन्नत मांगने गया था। लेकिन मौत उसे करीब 640 मीटर गहरी खाई में खींचकर ले गई। बेटे के शव की हालत देखकर पिता मुकेश व रिश्तेदार अपने आप को संभाल नहीं पाए। बुधवार दोपहर बाद तक उत्तरकाशी में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी हुई। संभावना है कि बृहस्पतिवार तड़के तक शव मेरठ पहुंचेगा। उधर, बुधवार सुबह कंकरखेड़ा में धेवते विशू के घर सांत्वना देने पहुंचे भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत अपने आंसू नहीं रोक पाए। विशू की मां और बहन की आस्था के आगे वे सच्चाई बताने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाए।
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शिवलोकपुरी कंकरखेड़ा निवासी समाजसेवी मुकेश चौधरी के पुत्र विश्वास धूहन उर्फ विशू चौधरी ने नोएडा की एक कंपनी में इंटरव्यू दिया था। वह विगत 26 अप्रैल को अपने तीन दोस्तों निशांत, गौरव और लक्ष्य के साथ गंगोत्री के एक मंदिर में मन्नत मांगने के लिए बाइक से निकला था। गंगोत्री के पास चढ़ाई के दौरान सामने से सेना का ट्रक आने पर विशू बाइक समेत खाई में फिसल गया था। उसके साथ बाइक पर मौजूद निशांत को सेना के जवानों ने तुरंत निकाल लिया था। लेकिन विशू खाई में समा गया था। आईटीबीपी द्वारा चलाए गए सर्च ऑपरेशन के बाद मंगलवार शाम उसका शव भैरव घाटी से बरामद हो पाया था। 
विशू के पिता मुकेश चौधरी ने बताया कि मंगलवार रात शव का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया। सुबह होने पर भैरव घाटी से करीब 300 किमी. दूर चाइना बॉर्डर के पास हर्सिल थाना पुलिस ने विशू के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। बुधवार दोपहर बाद पोस्टमार्टम हुआ। जिसके बाद कागजी कार्रवाई में समय लग गया। देर और अधिक दूरी होने की वजह से विशू का शव बृहस्पतिवार तड़के तक मेरठ आने की संभावना जताई गई है। 
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कई जगह फ्रेक्चर, हड्डियां तक टूटीं
बुधवार सुबह सेना के जवानों ने बताया कि भैरव घाटी की जिन झाड़ियों में विशू पड़ा मिला, वहां तक गहराई 640 मीटर थी। जोकि आधा किमी. से भी ज्यादा है। इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद विशू के शरीर का कोई भी अंग ऐसा नहीं था जो सुरक्षित बचा हो। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार शरीर में दर्जनों जगहों पर फ्रेक्चर हैं। सिर और चेहरे की हड्डियां तक टूटी मिलीं।
 
पत्नी व बेटी को कैसे समझाऊं 
पिता मुकेश ने बताया कि बेटे के शरीर का हाल देखकर मैंने तो मान लिया कि विशू उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर चला गया। लेकिन उसकी मां सविता व बहन मालविका को कैसे समझाऊंगा। जो अभी भी उसकी मौत की खबर से बेखबर हैं। वहीं दादा जी तो हार्ट पेशेंट हैं। उन्हें सिर्फ यही पता है कि रेस्क्यू अभियान चल रहा है और विशू को सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है। 

टिकैत भी हिम्मत नहीं जुटा पाए
वहीं, राकेश टिकैत भी विशू का शव बरामद होने के बाद अपनी भांजी सविता व धेवती मालविका को सांत्वना देने शिवलोक पुरी कंकरखेड़ा पहुंचे। लेकिन मां-बेटी की विशू के जीवित होने की उम्मीद और आस्था देखकर सच बताने की हिम्मत नहीं जुटा सके। आखिर में यही बोले कि विशू अभी ठीक है। उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है। हालांकि परिवार के अधिकांश लोगों और रिश्तेदारों को बता दिया गया है कि विशू का शव बरामद हुआ है।
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