नौनिहाल जन्मजात हृदय रोग (कंजाइटल हार्ट डिजीज) के शिकार हो रहे हैं। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में पिछले एक साल में छह बच्चों के दिल के छेद बंद करने पड़े हैं। ऐसा होने के कई कारण हो सकते हैं। चिकित्सक इन बीमारियों के प्रति जागरूक रहने की सलाह देते हैं।
मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शशांक पांडे ने बताया कि बच्चों में दिल का छेद होने की बीमारी के मामले काफी संख्या में प्रकाश में आ रहे हैं। यह एक विकास दोष (डेवलपमेंटल डिफेक्ट) है, मतलब जब बच्चा मां के पेट में बढ़ रहा होता है, तब दिल का विकास एक छोटे से ट्यूब से होता है। इस ट्यूब के अंदर कभी-कभी एक ट्विस्ट आ जाता है, जिससे वहां एक विभाजन हो जाता है।
जब इस विभाजन के बनने में कोई प्रॉब्लम आती है, तब इसको दिल का छेद बोला जाता है। हृदय के बाएं और दाएं हिस्से को बांटने वाले विभाजन में कुछ जगह रह जाती है। बाई साइड में जो प्रेशर वाला खून है वो दाहिनी तरफ चला जाता है।
मेडिकल के हृदय रोग विशेषज्ञ सीबी पांडे ने बताया कि दिल के छेद में बच्चे के दिल और फेफड़ों पर प्रेशर पड़ता है। ऐसे बच्चों में जन्म के बाद सांस फूलना, दूध पीते ही थक जाना, पसीना ज्यादा आना, वजन कम बढ़ना, बार-बार सर्दी, कफ और निमोनिया जैसी समस्या होती है। जिन बच्चों में छेद बड़े होते हैं उनमें छोटी उम्र में ही फेफड़े हमेशा के लिए खराब हो जाते हैंं।
जिन बच्चों के दिल के पर्दे में छेद होता है, उनका इलाज ओपन हार्ट सर्जरी से किया जाता है। इसके अलावा बिना ऑपरेशन के तरीके में हाथ या पैर की नसों में एक यंत्र डाला जाता है, ये यंत्र दिल तक पहुंचाया जाता है। उसके बाद छेद को बंद किया जाता है।
जन्मजात हृदय रोग के कारण
चिकित्सकों का कहना है कि पूरी तरह से यह कहना तो संभव नहीं है कि किस कारण से दिल का छेद होता है, लेकिन आनुवांशिक कारण, वायरल संक्रमण, कुछ दवाएं, गर्भवती महिलाओं का शराब, धूम्रपान का सेवन आदि के कारण यह समस्या हो सकती है।
मेडिकल में इन बच्चों के दिल के छेद बंद कर दिया गया नया जीवन
सात जून 2023: दो साल की लक्षी, दो साल की एंजल
6 मई 2023: अयन 12 साल,
12 मई 2023: ध्रुवी साढ़े तीन साल
9 मई 2022: रिदा 9 माह और निधि 9 साल