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भटकी रैपिड और मेट्रो की राह

Sat, 19 Nov 2016 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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मेट्रो ट्रेन के महत्वाकांक्षी प्रस्ताव पर प्रदेश सरकार की नींद टूट नहीं रही है। वहीं, रैपिड ट्रेन की डीपीआर भी इसी माह फाइनल होनी है। लेकिन अभी कई पेंच हैं, जिन्हें इसी माह दूर कर पाना टेढ़ी खीर साबित होगा।
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राइट्स एवं स्थानीय अधिकारियों ने मेरठ मेट्रो की डीपीआर को फाइनल कर शासन को भेज दिया था। तत्कालीन मुख्य सचिव आलोक रंजन ने 30 जून को रिटायरमेंट के दिन इस डीपीआर को हरी झंडी दी कि इसे कैबिनेट के पास भेजकर अनुमोदन ले लिया जाए। बावजूद इसे कैबिनेट के पास भेजा तक नहीं गया।

कई बिंदुओं पर थी आपत्ति
डीपीआर में कई बिंदुओं पर आपत्ति को दूर कर दिया गया था। मसलन जगह की दिक्कत सामने आ रही थी। 14 स्टेशन ऐसे प्रस्तावित हैं, जहां जगह की किल्लत है। यहां पिक एंड ड्रॉप सिस्टम पर बात की गई थी। धन के इंतजाम पर भी विस्तृत रिपोर्ट बनाने को कहा गया था, जिसे बना दिया गया था।
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लटका है प्रस्ताव
चार माह से ज्यादा होने के बाद भी अभी यह प्रस्ताव अटका ही है। स्थानीय अधिकारियों ने एलएमआरसी अधिकारियों को भी कई बार याद दिलाया। लेकिन सब हाथ खडे़ कर रहे हैं। दरअसल मामला सरकार से जुड़ा है और वर्तमान में सरकार अपने ही राजनीतिक घमासान में उलझी है। ऐसे में यह प्रकरण भूल सी गई है।

इसी माह रैपिड डीपीआर की डेडलाइन
दिल्ली से मेरठ के बीच प्रस्तावित रैपिड ट्रेन को लेकर भी इस माह कई काम होने हैं। लेकिन ऐसा लग नहीं रहा है कि इस माह डीपीआर फाइनल कर दी जाएगी। दरअसल, वर्कशॉप के बाद स्थानीय अधिकारियों से भी डीपीआर बनाने वाली एजेंसी ने कोई संपर्क अभी नहीं किया है। कौशांबी में पांच नवंबर को हुई एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी बीके त्रिपाठी और केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी डीएस मिश्रा ने नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) की बैठक में निर्देश दिए थे। एनसीआटीसी के प्रबंध निदेशक वीके सिंह ने बताया कि डीपीआर तैयार है। इसे फाइनल रूप में केंद्र सरकार और कैबिनेट के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने में करीब छह माह का समय लगेगा। जिसके बाद हाई स्पीड ट्रेन का काम धरातल पर दिखने लगेगा। कहा गया था कि इसी माह डीपीआर दे दी जाए। वहां भी डीपीआर को छह माह का समय लगेगा, यानी अभी इसकी राह भी स्पष्ट होने में अगले साल ही बात बनेगी।

ट्रैक को लेकर है सवाल
दिल्ली में आनंद विहार तक और मेरठ में शताब्दी नगर से शास्त्रीनगर के बीच हाईस्पीड ट्रेन अंडरग्राउंड ट्रैक पर दौड़ेगी। जबकि गाजियाबाद से मेरठ के बीच नेशनल हाईवे पर यह रोड के बीच एलिवेटेड ट्रैक पर दौड़ेगी।  मेरठ में इसको लेकर सवाल खड़े हो गए थे। दरअसल यहां मेट्रो का भी प्रोजेक्ट है और दोनों का एलाइनमेंट एक साथ ही है। ऐसे में यहां इसे लेकर कई बार सवाल उठे हैं कि रैपिड को शहर में ले जाया जाए या बाहर बार ही मोदीपुरम तक भेजा जाए।
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