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बंगला नंबर 210 बी: फैक्ट और कॉल में छिपी लापरवाही

Thu, 08 Sep 2016 02:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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बंगला नंबर 210 बी आरआर मॉल की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जांच अभी चल रही है। कार्रवाई के फैक्ट और दीपक शर्मा को की गई कॉल में इस बात का राज छिपा है कि आखिर किस की लापरवाही से चार लोग मलबे में दबे। आदेश और उसके पालन में फर्क साफ नजर आता है। पुलिस और अधिकारियों को रात 11 बजे पहुंचने को कहा गया था, लेकिन अधिकारी सुबह पहुंचे। सूत्रों के मुताबिक दीपक को फोन एक पुलिस वाले ने किया था। उसकी सूचना पर वह पहुंचे।
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गौरतलब है कि गत नौ जुलाई को कैंट बोर्ड ने हाई कोर्ट के आदेश पर बंगला नंबर 210 बी की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की थी। इस दौरान मलबे में दबने से दीपक शर्मा और उनके बेटे समेत चार लोगों की मौत हो गई थी। मामले में कैंट बोर्ड सीईओ समेत छह अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। सीईई अनुज सिंह जेल में है। डीएम ने कार्रवाई के लिए सिटी मजिस्ट्रेट केशव कुमार, देवेंद्र सिंह अपर नगर मजिस्ट्रेट सेकेंड, राकेश कुमार सिंह अपर नगर मजिस्ट्रेट फर्स्ट और ऋतु पूनिया उप जिला मजिस्ट्रेट की ड्यूटी अनाधिकृत निर्माण हटाने के लिए लगाई थी।
इनको आठ जुलाई की रात 11 बजे पहुंचने का आदेश दिया था। एसपी सिटी ओम प्रकाश ने सीओ सिविल लाइन बीएस वीर कुमार, सीओ कोतवाली कुंवर रणविजय सिंह, लालकुर्ती, सदर बाजार, रेलवे रोड थानेदार को पुलिस बल के साथ उपस्थित रहने को कहा था। थाना प्रभारी समेत 152 पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। दो प्लाटून पीएसी तैनात की गई थी। सुबह पांच बजे दीपक शर्मा के पास एक फोन गया। सूत्रों की माने तो वह एक पुलिस कर्मी का था। हर प्वाइंट पर ड्यूटी तय थी। बावजूद इसके दीपक शर्मा का पहुंचना और अंदर जाने में रोकटोक नहीं हुई। कम्युनिकेश गैप रहा। जांच में किसकी लापरवाही रही यह स्पष्ट होना है। कैंट बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर होने के अलावा अभी केस में और कुछ नहीं हुआ। दो महीने होने को हैं।
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