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Meerut News: नकली सिगरेट फैक्टरी के आरोपी की जमानत खारिज

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- गोशाला की आड़ में चल रही थी फैक्टरी
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- एक महीने बाद भी पूरे सिंडिकेट का खुलासा नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। थाना क्षेत्र के गांव दृधली खादर में गोशाला की आड़ में आईटीसी कंपनी के ब्रांडेड प्रीमियम सिगरेट के नाम पर नकली सिगरेट बनाने के मामले में आरोपी रवि किशोर को अदालत से राहत नहीं मिली। अपर सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या-12) जयवीर सिंह नागर की अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। वहीं, करीब 10 करोड़ रुपये के मशीनों और सामान से जुड़े इस मामले में एक महीने बाद भी पूरे सिंडिकेट का खुलासा नहीं होने से जांच पर सवाल उठ रहे हैं।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फरजाना मकसूद ने बताया कि तीन सितंबर 2026 को आईटीसी कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि रीशू मिश्रा निवासी छतरपुर एक्सटेंशन, नई दिल्ली ने हस्तिनापुर थाने में सूचना दी थी कि गांव दूधली खादर के पास गौशाला की आड़ में कंपनी के नाम पर नकली सिगरेट बनाई जा रही हैं। सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो गौशाला के अंदर बने कमरों में सिगरेट बनाने की बड़ी यूनिट संचालित मिली।
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छापे के दौरान पुलिस और नायब तहसीलदार जितेंद्र कुमार की मौजूदगी में मौके से नकली सिगरेट के 94 कार्टन रेडीमेड, प्रीमियम सिगरेट के 13 कार्टन, खुली सिगरेट के 19 कार्टन, गोल्ड के 124 कार्टन, ब्लैक के 15 कार्टन, आउटर रोल रैपर के 15 कार्टन और फिल्टर के तीन कार्टन बरामद किए गए। इसके अलावा सिगरेट बनाने की ऑटोमैटिक मशीन भी मिली। मौके से पकड़ा गया आरोपी रवि किशोर निवासी नेहरू नगर, दक्षिण दिल्ली सिगरेट निर्माण से संबंधित कोई वैध दस्तावेज या लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सका था।
सुनवाई के दौरान एडीजीसी फरजाना ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि आरोपी ने आईटीसी जैसी प्रतिष्ठित कंपनी के नाम का कथित रूप से दुरुपयोग कर धोखाधड़ी की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपराध की गंभीरता और वैध लाइसेंस नहीं होने के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।
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एक महीने बाद भी मास्टरमाइंड तक नहीं पहुंची पुलिस
नकली सिगरेट फैक्टरी का खुलासा होने के बाद पुलिस ने रवि किशोर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और पूरे नेटवर्क के खुलासे का इंतजार है। करीब 10 करोड़ रुपये के बड़े सेटअप की बरामदगी इस कारोबार के व्यापक स्तर की ओर इशारा करती है। मामले के तार कंबोडिया से जुड़े होने की बात सामने आने के बावजूद नेटवर्क के अन्य कथित संचालकों की भूमिका अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े कारोबार को कौन संचालित कर रहा था और इसके पीछे शामिल अन्य लोगों तक पुलिस कब पहुंचेगी।
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