उत्तर प्रदेश के बड़ौत तहसील क्षेत्र में एक माह में दो तेंदुए की मौत रहस्मय बनी गई है। दूसरी तरफ वन विभाग जांच करने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहा है। इससे लगातार वन्य जीव की जान पर खतरा मंडरा रहा है।
याद दिला दे 15 दिसंबर को शाहपुर बाणगंगा के जंगल में शिकारियों ने एक नर तेंदुए को मौत के घाट उतार दिया था, लेकिन एक माह बीतने को है, लेकिन अभी तक वन विभाग उसकी मौत कैसे हुई और किसने की, इसका पता नहीं लगा पायी है। दो दिन पहले दिल्ली-सहारनपुर रेलवे मार्ग पर बावली रेलवे अंडर पास के पास मृत पड़ी मिली डेढ़ साल मादा तेंदुए शावक का शव मिलने से वन विभाग के अफसरों में हड़कंप मच गया।
हालांकि वन विभाग मादा तेंदुए के शावक की मौत का कारण वहां से गुजर रही अजमेर एक्सप्रेस ट्रेन से टकराना बता रहा है, लेकिन यदि गौर करें तो यदि मादा तेंदुए शावक ट्रेन से टकराता तो उसकी हालत बहुत खराब हो जाती, जबकि मादा तेंदुए के शरीर पर कहीं भी ट्रेन की टक्कर के निशान तक मौजूद नहीं थे।
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अनुमान लगाया जा रहा है कि मादा तेंदुए को कहीं दूसरी जगह पर पीट-पीटकर मारा गया था और उसके बाद पहले उसका शव रेलवे ट्रैक पर इस इरादे से रख दिया गया कि ट्रेन से कटकर उसके टुकडे़ हो जाए, लेकिन बाद में उसका शव ट्रैक से उठा पास में ही डाल दिया। इस बात के सभी सुबूत भी मौजूद हैं।
वहीं रेलवे स्टेशन बड़ौत के अधिकारी इस बात से स्पष्ट इंकार कर रहे हैं कि किसी भी ट्रेन की टक्कर से तेंदुए की मौत नहीं हुई है। वन रेंजर राजपाल सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मादा तेंदुए के शावक की मौत का कारण पता चल सकेगा। शाहपुर बाणगंगा में मारें गए तेंदुए के आरोपियों की धर पकड़े के लिए क्षेत्र के जंगल में दबिशें जारी है।
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