एसटीएफ ने इनकी छानबीन शुरू कर दी है। पकड़े गए सॉल्वरों से एसटीएफ यह जानने का प्रयास कर रही है कि कहीं वह परीक्षा में तो नहीं बैठे थे। अकेले बागपत से ही इस गैंग के संपर्क में 50 से 70 अभ्यर्थी थे, जिनमें से करीब 10 ने प्रमाणपत्र, चेक भी दे दिए थे। 15 लाख में भर्ती का दावा कर 12 लाख में सौदा किया जा रहा था।
सॉल्वर अजय पहले भी जा चुका है जेल
बड़ौत कोतवाली प्रभारी संजीव कुमार ने बताया कि बालैनी का सॉल्वर अजय पहले भी जेल जा चुका है। प्रतियोगी परीक्षा कराने में वह पहले पकड़ा गया था।
पकड़े गए वीरेंद्र और शैलेंद्र उर्फ सूरज मलिक दोनों ठग शातिर हैं। एसटीएफ कई माह से उनकी तलाश में लगी थी। दोनों के नंबर सर्विलांस पर लगा रखे थे, पर ये एसटीएफ के हाथ नहीं चढ़ रहे थे। ये लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे ले लेते थे। जिसका नंबर आ जाता था लोगों से यह कहकर पैसा ऐंठ लेते थे कि उन्होंने ही उनकी नौकरी लगवाई है। नौकरी न लगने पर जो लोग पैसा मांगते थे, उन्हें धमकी देते थे।
एसटीएफ नोएडा की टीम ने शिवालाकलां पुलिस के साथ गांव मझौला गुर्जर में छापा मारकर गांव के गुलाब सिंह के पुत्र वीरेंद्र सिंह व मेरठ जिले के गांव भदौड़ा थाना रोहटा हाल निवासी बागपत रोड मुल्तान नगर सुमनपुरी किशनपुरा मेरठ निवासी शैलेंद्र मलिक उर्फ सूरज मलिक को दबोचा है। दोनों के पास से ठगी किए गए एक लाख 65 हजार रुपये नगद, पांच एडमिट कार्ड, चार मोबाइल, दो कार बरामद की हैं। दोनों को दबोचने वाली टीम में एसटीएफ नोएडा के प्रभारी अक्षयवीर त्यागी, दरोगा ब्रह्मप्रकाश शर्मा, पुलिसकर्मी बबलू चौधरी, देवदत्त, मनोज कुमार, सुनील तोमर के अलावा शिवालाकलां थानाध्यक्ष अमन सिंह शामिल रहे।
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