बॉलीवुड के मशहूर निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा
- फोटो : अमर उजाला
बॉलीवुड के मशहूर निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा ने अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स अभियान का पोस्टर लांच किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक समाज को महिलाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा समाज को नई दिशा और विचारधारा देने का कार्य महिलाओं ने किया है।
जौहड़ी गांव में निर्माणाधीन फिल्म सांड़ की आंख के सेट पर पहुंचे प्रकाश झा अमर उजाला के अभियान का हिस्सा बने। उन्होंने कहा कि सिनेमा जगत में भी महिलाओं की भूमिका अग्रणी रही है। इसी तरह राजनीति, खेलकूद और सामाजिक क्षेत्रों में महिलाओं ने खुद को साबित करके दिखाया है। जिस समाज और राष्ट्र में महिलाओं का सम्मान होता है, वहां की तरक्की कोई नहीं रोक सकता।
फिल्म सांड़ की आंख में भी शूटर दादी चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर के जीवन संघर्ष को दिखाया है। दोनों महिलाओं के सम्मान में यह बायोपिक बनाई जा रही है। यूपी के ग्रामीण अंचल की यह प्रेरक कहानी एक कामयाब फिल्म का रूप लेगी। शूटर दादी भी वर्तमान में लड़कियों और महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
जानिए प्रकाश झा को
बिहार के चंपारण में 27 फरवरी 1952 को जन्मे प्रकाश झा ने बॉलीवुड में एक से बढ़कर एक कामयाब फिल्म दी हैं। साल 1984 में हिप हिप हुर्रे से कॅरियर की शुरुआत करने वाले प्रकाश झा ने बंदिश, मृत्युदंड, दिल क्या करें, गंगाजल, अपहरण, राजनीति, आरक्षण, जय गंगाजल और फ्रॉड सैंय्या जैसी फिल्में दी हैं।
ऐसे जुड़ा बागपत से नाता
शूटर दादी चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर की बायोपिक में प्रकाश झा उनके ससुर की भूमिका निभा रहे हैं। शूटिंग के लिए इन दिनों वह बागपत के जौहड़ी गांव में डटे हुए हैं।
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