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बच्चों की सेहत सुधारने वाला सिस्टम ही ‘कुपोषित’

Mon, 14 Nov 2016 02:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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कुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने वाला सिस्टम ही ‘कुपोषित’ हो गया है। पिछले 13 दिन से आंगनबाड़ी केंद्रों के कुपोषित बच्चों को न दूध मिला है और न ही फल और घी। बच्चों की अतिरिक्त खुराक बंद हो गई है। महकमा बजट न होने का रोना रो रहा है, पर इन बच्चों के पोषण की फिक्र किसी को नहीं है।
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प्रदेश सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से ऐसे बच्चों को पोषित करने की योजना चलाई जो कुपोषित हैं। इन बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए केंद्रों पर अतिरिक्त खुराक देने की बात कही जा रही है। राज्य पोषण मिशन के अंतर्गत इसकी व्यवस्था की गई है। अति कुपोषित बच्चों को प्रतिदिन 13 रुपये की खुराक में कुपोषण से बाहर निकालने की कवायद की जा रही है। प्रतिदिन प्रत्येक बच्चे को दो रुपये का भोजन, तीन रुपये का फल तथा 8 रुपये 11 पैसे का देशी घी दिया जा रहा है। घी का हाल यह है कि महकमा आधा किलो देशी घी का पैकेट बच्चे के परिजनों को देता है, जिससे उसे घर पर ही खिलाया जा सके। सरकार ने इसकी मॉनिटरिंग भी की है और इसी माह सचिव वित्त शुभ्रा सक्सेना मेरठ आकर इस कार्यक्रम की समीक्षा भी कर चुकी हैं। इसके अलावा बच्चाें को अन्य खुराक देने का भी प्रावधान है।

छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चे
सोमवार - मीठा दलिया
मंगलवार - खिचड़ी
बुधवार - हलुआ
बृहस्पतिवार - तहरी
शुक्रवार - मीठा दलिया
शनिवार - हलुआ
नोट: इसके अलावा प्रतिदिन एक फल और 20 ग्राम देशी घी।

तीन से छह वर्ष के बच्चे
प्रतिदिन का मेन्यू - मुरमुरा चना एवं ग्लूकोज बिस्किट का पैकेट। प्रतिदिन 20 ग्राम देशी घी तथा एक फल।
 
इस माह नहीं मिली खुराक
इस माह बच्चों को खुराक मिली ही नहीं है। जनपद में 2076 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें आठ हजार बच्चे अति कुपोषित हैं। इसके अलावा कुपोषित बच्चों की संख्या 20 हजार के पार है। अति कुपोषित बच्चों को यह खुराक हर सूरत में मिलनी चाहिए थी। बावजूद इसके ऐसा नहीं हो पा रहा है। सितंबर में आंगनबाड़ी कार्यकत्री हड़ताल पर थी। इस माह में बच्चों को खुराक नहीं मिली। अक्तूबर में किसी तरह से सभी केंद्रों को चलाया गया। बजट भेजा गया पर इस माह फिर से हालत खराब हो गई है। बजट भेजा ही नहीं जा सका है। नतीजा, बच्चे मायूस हैं।
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