वेस्ट यूपी में जुलाई माह के आखिरी सप्ताह में हुई भारी बारिश ने किसानों को काफी राहत दी। उनको फसलों की सिंचाई के काम से काफी राहत मिल गई। इसका फायदा उठाते हुए किसानों और ग्रामीण युवाओं ने कांवड़ यात्रा की तैयारी शुरू कर दी है।
हरिद्वार से करोड़ों की संख्या में कांवड़िये जल उठाते हैं। यूपी के अलावा, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश से भी लाखों लोग पहुंचते हैं। एक दिन में करीब 40 से 60 किमी की पैदल यात्रा कर कांवड़िये हरिद्वार पहुंचते हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान के अलावा पीलीभीत, आगरा, अलीगढ़, झांसी और अन्य दूर के जिलों के कांवड़ियों का कई दिन पहले ही आना शुरू हो गया है।
देहात से ज्यादा जाते हैं शिवभक्त
मेरठ के करनावल, पबला, अम्हेड़ा, सलारपुर, पथौली, करनावल, मसूरी, रोहटा, सैनी, डालमपुर, चिंदौड़ी, दौराला, भैंसा, भामौरी, सलावा, कपसाड़, सकौती समेत अन्य गांवों से भारी संख्या में कांवड़िये हरिद्वार पहुंच रहे हैं। पबला निवासी रोहित ने बताया कि 26 व 27 जुुलाई को हुई भारी बारिश से गन्ने की फसल की सिंचाई नहीं करनी पड़ी। धान की अधिकांश रोपाई भी जुलाई तक पूरी हो चुकी है। इसलिए पूरी टीम के साथ कांवड़ लाने की तैयारी की है। चिंदौड़ी निवासी संदीप, पथौली निवासी वरुण सांगवान, भदौड़ा से सुबोध, दौराला निवासी संजय ने बताया अच्छी बारिश ने किसानों को काम से फुर्सत दे दी है। ऐसे में गांव के नौजवान कांवड़ लाने के लिए कूच कर रहे हैं।
अगस्त में शिवरात्रि से फुर्सत
शिवभक्तों का कहना है कि देहात में फसल की देखरेख का काम ही मुख्य है। यदि शिवरात्रि 20 जुलाई तक पड़ती है तो उस समय धान की रोपाई का काम प्रभावित होता है। लेकिन इस बार शिवरात्रि 9 अगस्त की है। ऐसे में धान की रोपाई का काम हो चुका है। शिवभक्तों के अब फुरसत ही फुरसत है।
कांवड़ सजावट में लगता है समय
सजावट की कांवड़ पूरी टीम के साथ आती है। इसमें चार-चार शिवभक्त कांवड़ लेकर चलते हैं। सजावट की कांवड़ में एक दिन में औसतन 30 किमी ही दूरी तय हो पाती है। हरिद्वार में कई दिन शिवभक्त भ्रमण करते हैं, उसके बाद कांवड़ उठाते हैं।