आयुष्मान से हटाकर राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना से जोड़े जाएंगे सैकड़ों लाभार्थी
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की बनाई जा रही सूची
दोनों योजनाओं के अलग अलग होंगे लाभार्थी
मेरठ। अभी तक आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना में जुड़े राज्य कर्मचारियों और पेंशनर्स को राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना से जोड़ा जाएगा। आयुष्मान योजना से इनका नाम हटाया जाएगा। इसकी कवायद चल रही है। कर्मचारियों और पेंशनर्स की सूची बनाई जा रही है। दोनों योजनाओं के लाभार्थी अलग- अलग किए जाएंगे।
जिले में सैकड़ों की संख्या में ऐसे सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स हैं जो आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना से जुड़े हैं और पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना के भी लाभार्थी हैं। अब ऐसे लोगों की छंटनी की जा रही है। सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स का नाम आयुष्मान योजना से हटाया जाएगा और उन्हें पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना में जोड़ा जाएगा। जब तक उनका नाम आयुष्मान में रहेगा वे
राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना से नहीं जुड़ पाएंगे। वहीं, कुछ ऐसे भी कर्मचारी या पेंशनर्स हैं जो आयुष्मान में जुड़े हुए नहीं थे, उनके लिए यह यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है। इस पर अमल चल रहा है।
उत्तर प्रदेश की सरकार ने अपने राज्य के कर्मचारियों और पेंशनर्स का विशेष ध्यान रखते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना 2023 की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश के कर्मचारी एवं पेंशनर्स को कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी। योजना के तहत उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को 5,00,000 लाख रुपयों तक के कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जाएगी। यूपी की सरकार अपने सभी कर्मचारी और पेंशनर्स के लिए ऑनलाइन सुविधा के माध्यम से यूपी स्टेट हेल्थ कार्ड बनवाएगी। आयुष्मान की ही तर्ज पर इस योजना के अंतर्गत इसका लाभ उत्तर प्रदेश के सरकारी चिकित्सा संस्थान, प्राइवेट अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के माध्यम से दिया जाएगा। इस योजना के माध्यम से यूपी के राज्य कर्मचारी और पेंशनर तथा उनके आश्रितों के इलाज का खर्च सरकार द्वारा दिया जाएगा, ताकि वे अपनी जरूरत के अनुसार सरकारी या प्राइवेट अस्पतालों से अपना इलाज करा सकें।
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यूपी सरकार द्वारा हेल्थ कार्ड बनवाने का मुख्य उद्देश्य अपने प्रदेश के कर्मचारियों को आत्मनिर्भर बनाना है। संबंधित विभाग खुद लाभार्थियों की सूची बना रहे हैं। इन्हें भी इलाज उन्हीं अस्पतालों में मिलेगा जो आयुष्मान योजना में पंजिकृत हैं। जिले में सरकारी समेत ऐसे 79 अस्पताल हैं।
- डॉ रविंद्र सिरोहा, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना