एशियन गेम्स में लगातार दूसरे दिन पदक जीता, मंगलवार को भाला फेंक में जीता था कांस्य
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। मेरठ के बागपत रोड ऋषिनगर निवासी पैरा खिलाड़ी आयुष वर्मा वर्मा ने भी पैरा एशियन गेम्स में लगातार दूसरे दिन पदक जीता। बुधवार को उन्होंने शॉटपुट स्पर्धा में प्रतिभाग करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर मेरठ समेत पूरे देश का नाम रोशन किया। मंगलवार को उन्होंने भाला फेंक इवेंट में कांस्य पदक जीता था। उनके पदक जीतते ही यहां ऋषिनगर में उनके पिता, भाई, भाभी सभी ने खुशी मनाई और मिठाई बांटी।
आयुष ने बुधवार को शॉटपुट में एफ 53 श्रेणी में प्रतिभाग करते हुए 8.16 मीटर की दूरी तय कर पहला स्थान प्राप्त किया और स्वर्ण पदक जीता। दूसरे स्थान पर हेमामी 8.09 मीटर के साथ रहे। तीसरे स्थान के एथलीट ने 6.81 मीटर दूरी प्राप्त की। उनके पदक जीतने पर उनके कोच रोबिन सिंह ने भी उन्हें बधाई दी। वहीं मंगलवार को उन्होंने भाला फेंक इवेंट में प्रतिभाग करते हुए कांस्य पदक जीता। उन्होंने भाला फेंक स्पर्धा में 17.83 मीटर दूरी प्राप्त की और कुल 793 अंक प्राप्त कर कांस्य पदक जीतकर मेरठ समेत पूरे देश का नाम रोशन किया था। इसी के साथ उन्होंने प्रतियोगिता में अपना पर्सनल बेस्ट भी बनाया। पहले 16.32 मीटर उनका पर्सनल बेस्ट था।
परिवार ने मनाया जश्न, मिठाई बांटी
आयुष के लगातार दूसरे दिन पदक जीतने के बाद घर में भी खुशी दोगुनी हो गई है। उनके पिता अनिल वर्मा और भाई अजय वर्मा ने भी मिठाई बांटकर खुशी मनाई। उनके भाई अजय ने बताया कि आज उनकी वर्षों की मेहनत सफल हो गई है। उन्होंने 2019 से पैरा खेलों में शुरुआत की थी। आज कई सालों की उनकी मेहनत रंग लाई है। उन्होंने इसके लिए उनके कोच रोबिन का भी धन्यवाद जताया।
2014 में सड़क दुर्घटना के बाद अपाहिज हो गए थे आयुष
पिता और भाई समेत सभी को भविष्य की होने लगी थी चिंता
रीढ़ की हड्डी में चोट के बाद पैर नहीं कर रहे थे काम, आज बन गए हैं सभी के लिए मिसाल
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। आयुष के पदक जीतने के बाद उनके घर में इस समय जश्न का माहौल है। उनके भाई अजय ने आयुष के उस समय को भी याद किया जब वह अपाहिज हो गए थे और उन्होंने हिम्मत तक नहीं हारी थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में आयुष बाइक पर सवार होकर किसी कार्य से जा रहे थे। रात के करीब 12 बजे थे और सामने चल रही एक गाड़ी के बंपर से उन्हें चोट ली। उनके साथ में एक और युवक बाइक पर था। दोनों को काफी चोट आई।
आयुष की रीढ़ की हड्डी में चोट आई और कई दिनों तक वह अस्पताल में भी रहे। हादसे के बाद से उनके पैरों ने भी काम करना बंद कर दिया। जिसके कारण वह व्हील चेयर पर आ गए। इस कारण सभी को उनकी चिंता रहने लगी थी, लेकिन आयुष ने हिम्मत नहीं हारी और 2019 में उन्होंने पैरा खेलों में जाने की सोची और खेलना शुरू किया। उन्होंने कोच रोबिन से प्रशिक्षण लेना शुरू किया। आयुष मानसिक रूप से अपने आप को मजबूत रखा और कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनके पिता अनिल वर्मा ने भी बेटे का पूरा साथ दिया। आयुष ने कई नेशनल, स्टेट चैंपियनशिप आदि में प्रतिभाग कर अच्छा प्रदर्शन करना शुरू किया।्र शॉटपुट, भाला फेंक आदि इवेंट में शुरुआत कर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक लेने शुरू किया। इसके बाद अब उन्होंने पैरा एशियन गेम्स में भी पदक जीतकर मेरठ का नाम रोशन कर दिया है। उनके पदक जीतने पर यहां पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। अजय ने बताया कि उन्होंने खेलों में जाने के लिए बहुत मेहनत की। दिन-रात 6 से 7 घंटे अभ्यास किया। इसी का नतीजा है कि आज वह पदक लेकर आए हैं और आज सरकार की ओर से भी उनकी प्रशंसा की जा रही है। आज आयुष कई और खिलाड़ियों के लिए मिसाल बन गए हैं।