फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अयोध्या विवाद पर मुस्लिम उलेमाओं ने किया मध्यस्थता का स्वागत, देखें किसने क्या कहा

Sat, 09 Mar 2019 02:33 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवबंद
विज्ञापन
देवबंद - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
70 साल पुराने राम मंदिर विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन मध्यस्थ तय किये हैं। जो दोनों पक्षों से बात कर आपसी सहमति से इसका हाल निकालेंगे। मध्यस्थता से इस मामले के हल को लेकर मुस्लिम उलेमा सहमत हैं। वहीं हिंदू संगठनों ने न्यायलय पर विश्वास जताते हुए इसका विरोध किया है। 
विज्ञापन


कमेटी के साथ हैं मुस्लिम
मध्यस्थता कमेटी में शामिल लोगों को निष्पक्ष रहकर मामले की पैरवी करनी चाहिये। इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। मध्यस्थता कमेटी के साथ सभी मुस्लिम खड़े हैं। बशर्ते मध्यस्थता कमेटी दोनों पक्षों को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले। -जैनुस साजिद्दीन, शहरकाजी

बैठकर निकालें हल  
सुप्रीमकोर्ट ने पहले भी मामले का हल आपसी सहमति से करने को कहा है। लेकिन कोई हल नहीं निकला। इस बार भी हल नहीं होगा। सुप्रीमकोर्ट ने मामले में मध्यस्थता कमेटी बनाकर मामले का हल निकालने को कहा है। अच्छा होगा बैठकर मामले का हल निकले।-जैनुर राशिद्दीन, नायब शहरकाजी

फैसला स्वीकार
बातचीत से मसला हल होता तो अभी तक हो जाता। मुसलमानों को सुप्रीमकोर्ट पर पूरा भरोसा है, जो भी फैसला आयेगा, वो स्वीकार करेंगे। अगर बातचीत से ही हल करना है तो आस्था की बुनियाद पर न हो। बल्कि सुबूतों के आधार पर मामले का हल निकाला जाये। - कारी शफीकुर्रहमान कासमी

देश में अमन कायम रहे
उम्मीद है तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल सुप्रीमकोर्ट को एक अच्छी रिपोर्ट पेश करेगा। देश में अमन कायम रहे, ये महत्वपूर्ण मुद्दा है। उम्मीद है दोनों पक्षों की धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखा जायेगा। -मशहूदुर्रहमान शाहीन जमाली चतुर्वेदी, उपाध्यक्ष मदरसा इमदादुल इस्लाम

राजनीति से दूर रहे मामला
अगर मामले पर सुप्रीमकोर्ट सुलह का रास्ता निकालता है तो हम उसका स्वागत करते हैं। मामले में सिर्फ राजनीति होती है। मामले को राजनीति से दूर रखकर हल निकाला जाये। मामले का निर्णय सुबूतों के आधार पर ही हो। -कारी अफ्फान कासमी, काजी ईदगाह लिसाड़ी 

जल्द निकले हल
सभी को पता है कि वहां राम जन्मभूमि है। फिर इसमें मध्यस्थता कैसी। कई बार मामले पर फैसला हुआ लेकिन बीच मध्यस्थता के चलते अटक जाता है। वहां बनेगा राम मंदिर ही। इसलिए इस मामले का जल्दी ही हल निकालना होगा। -गोपाल शर्मा, विभाग मंत्री, विश्व हिंदू परिषद 

मध्यस्थता का रास्ता सही नहीं
आपसी सहमति के कई बार प्रयास हुए हैं, लेकिन मुस्लिम पक्ष कभी बातचीत को नहीं आया। दूसरे पक्ष के पास कोई साक्ष्य नहीं है। विवादित जमीन राम जन्मभूमि है। ऐसे में मध्यस्थता का जो रास्ता बताया है, वह सही नहीं है। -बलराज डूंगर, प्रदेश संयोजक, बजरंगदल
विज्ञापन

मध्यस्थता हो
अयोध्या भूमि का विवाद मध्यस्थता से ही होना चाहिए। न्यायालय में काफी समय से मामला अटका है। हिंदू और मुस्लिम दोनों ही मध्यस्थता पर सहमत हैं। अब शीघ्र ही अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर बना चाहिए। -मां नीलिमानंद महाराज, महामंडलेश्वर। 

टालने वाला निर्णय
मध्यस्थता तो बहुत पहले हो सकती थी। अब मामला निपटने पर आया है तो फिर न्यायालय की बात होने लगी। यह निर्णय मामले को टालने वाला है। मध्यस्थता से कुछ निकलने वाला नहीं है। न्यायालय स्तर पर ही निस्ताण होना चाहिए। -कृष्ण स्वरूप ब्रह्मचारी, जगद्गुरु
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें