बाबरी मस्जिद शहादत दिवस को मुस्लिम संगठनों ने काला दिवस के रूप में मनाया। अयोध्या में मस्जिद विध्वंस को राष्ट्रीय एकता पर हमला बताया गया। राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित ज्ञापन एसडीएम सत्येंद्र कुमार को देते हुए बाबरी मस्जिद को शहीद करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने, विवादित स्थल पर मस्जिद बनवाने की मांग की।
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इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, ऑल इंडिया मुस्लिम फ्रंट और ऑल इंडिया मजलिस ने ज्ञापन में कहा कि देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने संसद में खड़े होकर विवादित स्थल पर मस्जिद बनवाने का वादा किया था। बाबरी मस्जिद को तोड़ने वालों के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सांप्रदायिक ताकतें इस मामले में झूठे मुकदमे गढ़कर मामले को उलझा रही हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से विवादित स्थल पर बाबरी मस्जिद बनवाने, अस्थायी मंदिर को हटाने, पूजा-पाठ पर रोक लगाने, लिब्राहम कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर मस्जिद तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने, राम मंदिर निर्माण की आड़ में संविधान, अदालत की अवमानना करने वाले अराजक तत्वों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम की धारा के अंतर्गत कार्रवाई करने, मुस्लिमों को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की गई। इस दौरान इलियास अहमद, मोहम्मद जिया, परवेज आफताब, ताहिर फारूकी, आफाक अंसारी, राशिद ठेकेदार, रिसालत हुसैन, हकीम हाफिज, संजय सागर, मशरूफ कमाल, नसीम अहमद आदि मौजूद रहे।
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