मामला जब बिगड़ गया और नवजात की मौत हो गई तो अस्पताल प्रशासन ने मृत नवजात को उसकी नानी की गोद में डाल दिया। जब प्रसूता को अस्पताल से घर ले जाने लगे तो उनसे 20 हजार रुपये की मांग की गई। न देने पर उसे जाने से रोक दिया।
इलाज में लापरवाही की शिकायत की तो चिकित्सकों और स्टाफ ने अभद्रता की। वह सास (नवजात की नानी) के साथ कमिश्नरी पहुंचा और सीएमओ से शिकायत की। नानी की गोद में मृत नवजात था और वह लगातार रोए जा रही थीं।
अल जौहर अस्पताल के संचालक नौशाद अली का कहना है कि महिला की डिलीवरी डॉ. शाहीन मालिक ने की है। पेट में ही बच्चे की हालत गंभीर थी। वेंटिलेटर न होने के कारण मंगलवार को नवजात को हायर सेंटर रेफर किया था।
पीड़ित परिवार के साथ जो डॉक्टर था, वह जिला पंचायत चुनाव के कारण मुझसे रंजिश रखता है। इसी कारण इस चिकित्सक ने ड्रामा कराया है। केवल डिलीवरी का छह हजार रुपये बिल लिया था। सब आरोप निराधार हैं।