कुष्ठ रोग को लेकर फैले अंधविश्वास से दूर रहें। यह एक बीमारी है, जिसका इलाज संभव है। इस बीमारी को दूर करने के लिए मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) दवा निशुल्क उपलब्ध है। कुष्ठ रोग के बनने में (इंक्यूबेशन अवधि) कुछ हफ्तों से 20 साल या उससे अधिक होती है। बीमारी की औसत अवधि पांच से सात साल होती है। लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 30 जनवरी को कुष्ठ रोग उन्मूलन दिवस मनाया जाता है।
30 जनवरी से 13 फरवरी तक स्पर्श कुष्ठ जागरूकता पखवाड़ा चलाया जाएगा। इस वर्ष अभियान की थीम 'कुष्ठ के विरुद्ध, आखिरी युद्ध' निर्धारित की गई है। पखवाड़े के दौरान लोगों को बताया जाएगा कि कुष्ठ लाइलाज नहीं है। गांवों, विद्यालयों और धार्मिक संस्थाओं में कार्यक्रम होंगे।
कुष्ठ रोग बैक्टीरिया (मायकोबैक्टीरियम लेप्रे) के कारण होता है। यह ग्रसित व्यक्ति द्वारा जीवाणु से फैलता है। पीड़ित व्यक्ति के खांसने, थूकने एवं छींकने से यह दूसरे की नाक व मुंह के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाता है।
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कुष्ठ रोगियों का हाल, साल दर साल
वर्ष मरीज पुरुष महिला बच्चे
2016-17 293 178 98 17
2017-18 225 139 81 05
2018-19 212 119 88 05
2019-20 235 157 76 02
2020-21 206 89 113 04
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कुष्ठ रोग के लक्षण
- हल्के रंग या तांबई रंग के दाग-धब्बे हो सकते हैं
- त्वचा के दाग-धब्बों में सुन्नपन, हाथ या पैरों में अस्थिरता या झुनझुनी
- हाथ, पैर या पलकों की कमजोरी, नसों में दर्द
- चेहरे या आंखों में सूजन या लालिमा
- हाथों या पैरों पर घाव या जलन
घर-घर जाकर करेंगे जागरूक
शहरी एवं देहात क्षेत्रों में घर-घर जाकर लोगों को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक करेंगी। आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कुष्ठ रोगियों की पहचान कर उन्हें इलाज के लिए प्रेरित करेंगी। - डा. केसी तिवारी, जिला कुष्ठ रोग अधिकारी