शहर की सड़कों पर अवैध होर्डिंग और यूनिपोल का जाल फैला है। ये कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। डायरेक्शन बोर्ड के नाम पर डिवाइडर और चौराहों पर यूनिपोल खड़े कर दिए गए और कार्रवाई के नाम पर नगर निगम ने आंखें मूंद लीं। निगम के खजाने को तो चूना लग ही रहा है, साथ ही शहर की जनता की जान भी जोखिम में है। अवैध होर्डिंग के कारोबारियों के सामने नगर निगम नतमस्तक है। होर्डिंग ठेकेदारों ने पीडब्लूडी, आवास विकास, नगर निगम के स्वागत द्वार और यूनिपोल तक पर कब्जा कर लिया है।
जून 2013 से फैला जाल
30 मई 2013 को नगर निगम प्रशासन और अभिनव एडवरटाइजिंग कंपनी के बीच बीओटी का अनुबंध हुआ था। उसके बाद अगले महीने से ही शहर की सड़कों पर अवैध यूनिपोल खड़े होने लगे। निजी हित के कारण निगम अधिकारियों ने भी कोई कार्रवाई नहीं की।
ये हैं बीओटी मार्ग
नगर निगम प्रशासन ने दिल्ली रोड, गढ़ रोड, हापुड़ रोड, कमिश्नरी आवास चौराहा से तेजगढ़ी, तेजगढ़ी से एल ब्लॉक शास्त्रीनगर, मोदीपुरम से कैंट होते हुए मवाना रोड सहित छह मार्गों को बीओटी पर दिया हुआ है। इन मार्गों के डिवाइडर और ग्रिल की रंगाई पुताई, स्ट्रीट लाइटों की रंगाई पुताई, रखरखाव और जलाने व बंद करने की जिम्मेदारी है।
26 की अनुमति, 130 से अधिक यूनिपोल
नगर निगम प्रशासन की मानें तो ठेकेदार को बीओटी मार्गो पर मात्र 26 स्थानों पर डायरेक्शन बोर्ड लगाने की अनुमति है। वह भी विद्युत पोलों पर। लेकिन स्थिति इससे अलग है। फिलहाल बीओटी मार्गों पर 130 से अधिक यूनिपोल और स्वागत द्वार खड़े हो गए हैं।
अनुबंध में भी यूनिपोल नहीं
हाईकोर्ट के आदेशानुसार सड़क के बीच डिवाइडर पर यूनिपोल नहीं लग सकते, वहीं निगम और ठेकेदारों के बीच हुए अनुबंध में भी यूनिपोल का अनुबंध नहीं है। इसके बावजूद शहर की सड़क और चौराहों पर यह धड़ल्ले से लगा दिए गए। यूनिपोल गिरने और हादसा होने के लिए जितना जिम्मेदार ठेकेदार है, उतना ही नगर निगम प्रशासन भी है।
ठेकेदार के सामने निगम नतमस्तक
शहर में डिवाइडर मार्गों पर लगाए गए अवैध यूनिपोल के खिलाफ एक साल पहले कुछ पार्षदों ने आवाज उठायी थी। उस दौरान ठेकेदार के लोगों ने महापौर पर भी हमला कर दिया था। मामला इतना बढ़ा कि ठेकेदार और पार्षदों ने एक-दूसरे पर जानलेवा हमले की धाराओं में मामले दर्ज कराए। लेकिन निगम प्रशासन चुप्पी साधे रहा। उसके बाद नगर निगम प्रशासन और निगम बोर्ड ने पूरी तरह होर्डिंग ठेकेदार के सामने घुटने टेक दिए। जिसका परिणाम अब सामने है।
ये है बीओटी का ठेका
नगर निगम ने शहर के छह मार्गों के डिवाइडरों की रंगाई पुताई, स्ट्रीट लाइट जलाने बुझाने और रखरखाव का बीओटी पर ठेका दिया था। इसकी एवज में ठेकेदार को डायरेक्शन बोर्ड लगाने थे, न की यूनिपोल। इसी तर्ज पर शहर के 17 चौराहों पर ट्रैफिक लाइट लगाने और चौराहे से निर्धारित दूरी पर डायरेक्शन बोर्ड और कुछ स्थान पर प्रचार करने का ठेका दिया था।
बगैर गजट के है बीओटी का ठेका
नगर निगम के अधिकारियों ने बीओटी के ठेके में इतना बड़ा खेल किया कि अपनी जेब भरने के चक्कर में राज्य सरकार से गजट कराना भी गवारा नहीं समझा। अधिकारियों की कार्य प्रणाली को लेकर नगर निगम के सदन में खूब हंगामे हुए, अधिकारियों ने गलती को स्वीकारा भी। लेकिन इस करनी के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराते रहे। बीओटी ठेके को डेढ़ साल बीतने को है, उसके बाद भी सरकार से गजट नहीं कराया गया है।
पैरवी को तैयार नहीं अधिकारी
ठेकेदार पर कार्रवाई करने से निगम प्रशासन बचता रहा है। स्टे ऑर्डर का बहाना बनाकर अधिकारी अपना बचाव कर रहे हैं। तत्कालीन नगरायुक्त उमेश प्रताप ने बीओटी ठेकेदारों के खिलाफ हाईकोर्ट तक में रिट दायर कर दी। लेकिन निगम अधिकारी उसपर पैरवी करने को तैयार नहीं हैं।
बीओटी मार्ग और चौराहों पर कमियां
छह मार्गों से चोरी हो चुके हैं स्ट्रीट लाइट के खंभे, नहीं जलती सभी लाइटें
दिल्ली रोड की डिवाइडर के बीच बनाए गए कटों पर नहीं लगे हैं रिफ्लेक्टर
डिवाइडर पर लगे विद्युत पोलों पर नहीं लगी है रिफ्लेक्टर पट्टी
चौराहों पर ग्रीन बेल्ट का नहीं होता रखरखाव
चौराहों पर लगी ट्रैफिक लाइट अव्यवस्थित
अनुबंध की शर्तें
बीओटी पर दिए गए 17 चौराहों के ट्रैफिक लाइट, फुटपाथ व स्ट्रीट लाइट के पोलों का रखरखाव, ट्रैफिक लाइटों को जलाने को जलाने बुझाने की व्यवस्था करनी होगी।
वर्ष में दो बार ट्रैफिक लाइट व पोलो की सफाई एवं रंगाई पुताई करानी होगी।
ट्रैफिक पोलो पर 6 गुना 6 इंच की तीन पट्टी जैसे लाल, पीली और सफेद रिफ्लेक्टिव टेप लगानी होगी।
चौराहों पर बनी ग्रीन बेल्ट को हरा भरा रखना और समय समय पर कटाई छटाई करना, फुटपाथ के किनारे वर्ष में एक बार पेंटिंग करना।
ठेकेदार सुविधाओं को भूला
महानगर की मुख्य छह मार्गों को भले ही नगर निगम ने बीओटी को दिया हो, लेकिन अनुबंध के तहत न तो मार्ग व्यवस्थित हैं और नहीं जनता को सुविधाएं मिल रही हैं। मुख्य मार्गों पर डिवाइडर कट आए दिन हादसे करा रहे हैं। डिवाइडरों पर लगे बिजली के खंभे, ग्रिल और कट पर रिफ्लेक्टर दिखाई नहीं देते।