नब्बे के दशक में वाजपेयी जी चुनावी जनसभा को संबोधित करने यूपी के देवबंद पहुंचे थे। यहां बदहाल सड़कों पर उन्होंने व्यंग करते हुए कहा था कि मुझे यहां सावन के झूलों जैसा आनंद आया। इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा जनसंघ को पांच मिनट में ठीक करने के ब्यान पर भी अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जनसभा में ऐसा जवाब दिया था जो आज भी लोग नहीं भूलते। जानें क्या था यह दिलचस्प वाकया :-
मैंने कभी सावन का झूला तो नहीं झूला, लेकिन रुड़की से यहां तक आते-आते वो कमी भी पूरी हो गई। मुझे गाड़ी में बैठे-बैठे सावन के झूलों जैसा आनंद आया। यहां सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क। यह व्यंग्य पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1995 में देवबंद में आयोजित एक चुनावी जनसभा में यूपी की बदहाल सड़कों पर किया था।वाकया उत्तराखंड के गठन से पहले का था।
उस समय हरिद्वार और सहारनपुर एक ही लोकसभा सीट थी। हरपाल साथी यहां से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे। उनकी चुनावी जनसभा के लिए देवबंद के एचएवी इंटर कालेज में विशाल मंच बनाया गया था। मंच पर आते ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पहले शब्द यही थे 'अरे मुझे तो पता ही नहीं चला कि कब रुड़की से देवबंद पहुंच गया हूं। अरे यहां सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क?'
उस जनसभा में मंच का संचालन कर रहे भाजपा नेता दीपकराज सिंघल बताते हैं कि जनसभा के बाद उनके घर पर वाजपेयी जी का लंच था। जब कार्यकर्ता उनके पास पानी का बड़ा गिलास लेकर पहुंचे तो उन्होंने हाथ जोड़कर कहा गिलास महाराज रात में दूध के समय भी ऐसे ही दर्शन देना।
वहीं उस समय जिला कोषाध्यक्ष राजकुमार त्यागी पुरानी याद ताजा करते हुए बताते हैं कि वाजपेयी जी का उनके गांव कुरड़ी में 21 राइफलों से स्वागत हुआ था। वाजपेयी जी चार घंटे कुरड़ी में रहे जहां उन्होंने बडे़ बुजुर्गों से बातें भी की थी। यहां पर वाजपेयी जी को उनके द्वारा 3.51 लाख रुपये की थैली भी भेंट की गई थी।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा जनसंघ को पांच मिनट में ठीक करने के बयान पर अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जनसभा इसका जवाब यूं दिया, 'इंदिरा जी आप जनसंघ को पांच मिनट में ठीक करने की बात कहती हैं। अरे पांच मिनट में तो आप अपनी जुल्फें भी ठीक नहीं कर पाएंगी'।