दारुल उलूम प्रबंधन ने विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के आकाओं के लिए दारुल उलूम के दरवाजे बंद कर दिए हैं। प्रबंधन का कहना है कि दारुल उलूम दीनी तालीम का मरकज है और इसका सियासत से कोई ताल्लुक नहीं है। इसलिए चुनाव के दौरान सभी सियासी दलों के प्रमुखों से दूरी बनाकर रखी जाएगी। सत्ताधारी दल समाजवादी पार्टी, बसपा या फिर कांग्रेस।
चुनाव के समय इन दलों के आका दारुल उलूम पहुंचकर उलमा से मिलते हैं ताकि उन्हें चुनाव में मुसलमानों का समर्थन मिल सके। पूर्व के विधानसभा चुनाव में दारुल उलूम ने कहा था कि संस्था दीनी इदारा है। इसलिए चुनाव के समय किसी भी राजनीतिक दल के रहनुमा से संस्था का कोई भी बड़ा ओहदेदार मुलाकात नहीं करेगा। यह फैसला इसलिए लिया गया था कि दारुल उलूम के उलमा से मुलाकात को मुद्दा बनाकर सियासी पार्टियों के नेता चुनाव में इसका लाभ उठा रहे थे। जिससे दारुल उलूम की साख को नुकसान पहुंच रहा था। इस बार भी दारुल उलूम ने ऐसे ही संकेत दिए हैं।
शनिवार को दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कहा कि दारुल उलूम दीनी इदारा है, जिसका सियासत से वास्ता नहीं है। इसलिए चुनाव के दौरान किसी भी राजनीतिक दल के प्रमुख से मुलाकात नहीं की जाएगी। साथ ही कहा कि यदि कोई लीडर दारुल उलूम पहुंचता है तो संस्था का कोई भी बड़ा ओहदेदार उनसे मुलाकात नहीं करेगा। वैसे दारुल उलूम के दरवाजे हर किसी के लिए खुले हुए हैं।