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अस्पतालों में एक्सपायर दवा की डोज

Sun, 04 Dec 2016 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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शहर के कुछ अस्पतालों में मुनाफे के चक्कर में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। मेडिकल स्टोर संचालक जानबूझकर एक्सपायर दवा दे रहे हैं। विरोध करने पर धौंस जमाते हैं। ऐसे ही दो मामले सामने आए हैं। शुक्रवार रात मेडिकल कॉलेज के पास स्थित एक निजी अस्पताल में एक्सपायर दवा देने पर जमकर हंगामा हुआ। वहीं गंगानगर में भी अस्पताल में ऐसा ही एक मामला सामने आया था। दोनों ही मामलों में अस्पताल संचालकों ने मामला दबा दिया।  
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मेडिकल कॉलेज के पास एक निजी अस्पताल में चार दिन पहले मरीज लीवर इंफेक्शन के कारण भर्ती हुआ था। शुक्रवार को उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। चिकित्सक ने करीब 18 हजार रुपये की दवा लिख दी। मरीज के परिजनों ने अस्पताल में ही संचालित स्टोर से दवा खरीद ली। जब उन्होंने दवा देखी तो उसमें 6 से 8 हजार रुपये की दवा एक्सपायर निकली। उन्होंने स्टोर संचालक से विरोध जताया तो काउंटर पर बैठे स्टाफ ने उन्हें हड़काते हुए कहा कि कंपनी ऐसे ही एक्सपायर लिख देती है, कोई दवा एक्सपायर नहीं होती। इसे लेकर परिजनों ने हंगामा कर दिया। मामला बढ़ता देख चिकित्सक और अस्पताल मैनेजमेंट हंगामा करने वालों को समझाने लगा। उन्होंने तुरंत एक्सपायर दवा वापस लेकर नई दवा दी। इसके बाद लोग शांत हुए।

गंगानगर के अस्पताल में भी सामने आया था मामला
कुछ दिन पहले गंगानगर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती मरीज को एक्सपायर दवा देने का मामला सामने आया था। इसे लेकर घंटों तक हंगामा हुआ था। जैसे तैसे कर अस्पताल संचालकों ने मामला मैनेज कर लिया।
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कैसे करें विश्वास
उन मरीजों के लिए यह खतरे की घंटी है, जिन्हें हफ्तों तक आईसीयू या अन्य वार्ड में रखा जाता है। यहां तीमारदार को सिर्फ मिलने की इजाजत होती है। ऐसे मरीजों पर एक्सपायर दवा का प्रयोग होता है तो यह जानलेवा हो सकता है।

मुनाफे का सौदा
एक्सपायरी दवाओं को मरीजों को दिए जाने के पीछे असली खेल मुनाफे का है। दरअसल एक्सपायरी दवा पर 80 से 100 प्रतिशत तक का मुनाफा होता है। क्योंकि कंपनियां एक्सपायरी दवा को या तो बिना रुपये लिए छोड़ देती हैं या फिर 10 से 20 प्रतिशत की कीमत ले लेती हैं। जबकि नियमानुसार कोई दवा एक्सपायर होती है तो संबंधित कंपनी उसे मेडिकल स्टोर और डीलर के यहां से उठाएगी। उसके बाद जिस जिले में एक्सपायर दवाओं को डिस्पोज करेगी उस जिले के ड्रग इंस्पेक्टर की मौजूदगी अनिवार्य होती है, लेकिन कुछ कंपनियां या मेडिकल स्टोर संचालक इस झमेले से बचने के लिए इस तरह का खेल खेलते हैं। जिसमें मुनाफा ही मुनाफा है।
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