फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी ऑल-बढ़ने से पहले ही बिखरने लगा आसपा का कुनबा

विज्ञापन
विज्ञापन
बढ़ने से पहले ही बिखरने लगा आसपा का कुनबा
विज्ञापन

मेरठ (प्रदीप मिश्र)। एक साल पहले 15 मार्च को बनी आजाद समाज पार्टी को चुनाव में उतरने से पहले ही झटके लगने लगे हैं। पंचायत चुनाव और अगले विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी नेतृत्व, नेताओं और कार्यकर्ताओं की बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। नतीजतन, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के नेता और कार्यकर्ता दूसरे दलों में ठिकाना तलाश रहे हैं।
पार्टी में दलितों और मुस्लिमों की संख्या ज्यादा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद को दलित जहां बसपा के विकल्प के तौर पर देख रहे थे, वहीं मुस्लिम उन्हें भाजपा से लड़ते देख रहे थे। इसके चलते पहली बार बुलंदशहर में विधानसभा उपचुनाव लड़ी पार्टी को बसपा प्रत्याशी से ज्यादा वोट मिले। इसके बाद पार्टी नेतृत्व गठबंधन करने का ख्वाब देखने लगा। सपा के साथ सबसे पहले बातचीत शुरू हुई। आसपा ने प्रदेश की सभी आरक्षित सीटों के साथ 100 विधानसभा सीटों पर दावा जताया।
विज्ञापन

आजाद ने मेरठ की हस्तिनापुर सीट भी अपने लिए मांगी। किसान आंदोलन के बाद रालोद की ताकत बढ़ने से दबाव में चल रही सपा ने आजाद को 10 से ज्यादा सीटें देने से मना कर दिया। सपा नेतृत्व सहारनपुर में दो, मेरठ और मुजफ्फरनगर में एक-एक सीट के अलावा मुरादाबाद, आगरा और अलीगढ़ मंडल में भी एक से दो सीट देने को तैयार था। इसके बाद आजाद ने सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का मंसूबा बनाया। वरिष्ठ पदाधिकारियों और संस्थापक सदस्यों ने इससे असहमति जताते हुए कहा कि ऐसे तो मुस्लिम और दलित वोटों का बटवारा होगा। इससे भाजपा का लाभ पहुंचेगा। सलाह नहीं माने जाने पर नेता दूसरे दलों में संभावना तलाशने लगे। बृहस्पतिवार को पार्टी के संस्थापक सदस्य बदर अली का इस्तीफा इसी का नतीजा है।
------
जिला पंचायत की टिकटों के लिए पैनल नहीं बना
जिला पंचायत सदस्य के चुनाव के लिए पार्टी की तैयारी अभी अधूरी है। पार्टी चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशियों को सदस्यता के लिए 20-20 बुक देकर उन्हें काटने के लिए कह रही है। सदस्यता का शुल्क दो हजार रुपये है। दावेदार इसके लिए तैयार थे लेकिन जब उनसे कहा गया कि इसके बाद भी उनकी दावेदारी पक्की नहीं होगी, इसका फैसला पैनल करेगा। जो सबसे ज्यादा सदस्य बनाएगा, उसे ही टिकट मिलेगा। इससे दावेदार छिटक गए, जबकि वरिष्ठ पदाधिकारी सलाह दे रहे थे कि जिसे भी चुनाव मैदान में उतारा जाए, उसे ही सदस्यता का लक्ष्य बढ़ाकर दे दिया जाए।
विज्ञापन

------
अब कांग्रेस से गठबंधन के लिए बातचीत शुरू
सूत्रों के अनुसार पार्टी अब कांग्रेस से चुनावी गठबंधन की सोच रही है। पार्टी मानती है कि इससे कांग्रेस को जहां पश्चिमी यूपी में फायदा पहुंचेगा, वहीं आसपा को प्रदेश के अन्य इलाकों में सांगठनिक विस्तार का मौका मिलेगा। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी और चंद्रशेखर के बीच बातचीत का प्रारंभिक दौर शुरू हो गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई सीटें हैं, जहां कांग्रेस को मुस्लिम और दलित समीकरण के हिसाब से मजबूत दावेदार नहीं मिल रहे हैं। सहारनपुर और मेरठ की किसान महापंचायत में अल्पसंख्यकों की भागीदारी से कांग्रेस ये दांव खेल सकती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें