शहर में सड़कों पर दौड़ रहीं डग्गेमार बसों (रोडवेज की नकली बस) पर लगाम नहीं लग पा रही है। शहर के कई इलाकों से चलने वाली ये अवैध बसें देखने में रोडवेज की बसें ही नजर आती हैं। यात्री इन बसों में रोडवेज समझकर चढ़ जाते हैं। बाद में उन्हें पता चलता है कि ये डग्गामार हैं। पुलिस और आरटीओ के संरक्षण में दौड़ रहे डग्गामार वाहन न केवल सरकारी राजस्व को फटका लगा रहे हैं बल्कि रोडवेज बसों के समानांतर चलकर ये इस विभाग के राजस्व पर भी डाका डाल रहे हैं। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार को इनकी पड़ताल की तो ये बसें दिल्ली रोड पर बेधड़क दौड़ती मिलीं।
भैसाली बस अड्डे के निकट उतारी सवारी
अमर उजाला टीम शाम तीन बजे भैसाली बस अड्डे के निकट स्थित मजार के पास बने इनके अस्थायी स्टापेज पर पहुंची। वहां दिल्ली से सवारियों को लेकर आई डग्गेमार बस (यूपी-14 डीएस 7281) और (यूपी 78 बीटी 2860) ने सवारी उतारी और यहां से घूमकर दोबारा दिल्ली की ओर सवारी लेते हुए चलने लगी। रेलवे रोड चौराहे तक कई सवारियों को बैठाया गया।
पुलिस की नाक नीचे हो रहा संचालन
डग्गामार बसों का संचालन पुलिस की नाक के नीचे चल रहा है। रेलवे रोड पर थाना भी है और रेलवे रोड चौराहे पर हर समय ट्रैफिक पुलिस रहती है। चौराहे के निकट केके इंटर कॉलेज के सामने इन बसों ने अपना स्थायी स्टॉपेज भी बना रखा है। टीम यहां पहुंची तो बस (यूपी-16 सीटी 2194) वहां पर दिल्ली जाने के लिए खड़ी थी। ये बसे यहां से रोजाना चलती हैं और चौराहे से पुलिस के सामने निकलकर जाती हैं।
थानों में देते हैं पैसा
टीम ने रेलवे रोड चौराहे पर खड़ी बस के स्टाफ से बात की तो उन्होंने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि आरटीओ स्टाफ से लेकर रूट के सभी थानों में पैसा दिया जाता है। दस साल पुरानी बसों को एनजीटी के आदेश से हटा दिया है। अब वे ही बसें चल रही हैं, जो दस साल पुरानी नहीं हैं।
150 डग्गामार बसों की सूची तैयार
रोडवेज ने डग्गामार बसों को चिह्नित करने के लिए सभी रूटों पर व्यापक अभियान चलाकर सर्वे कराया है। सर्वे रिपोर्ट में करीब 150 डग्गामार बसें चलती मिली हैं। रोडवेज ने इन बसों का नंबर, रंग, इन पर लिखे गए शब्दों आदि के साथ सूची तैयार की है। यह सूची रोडवेज एमडी के साथ ही मंडलायुक्त, एसएसपी और आरटीओ को सौंपी जाएगी।
नेताओं की हैं ये बसें
बस स्टाफ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ये बसें सपा सरकार में रहे दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री की हैं। इन सभी बसों को पहचान देने के लिए वैशाली मेट्रो लिखा गया है। इसके अलावा भी कई अन्य नेताओं की भी बसें हैं या इन बसों का उनका संरक्षण मिल रहा है।
बसें की जा रही हैं सीज
डग्गामार बसों को पकड़ने के लिए पूरा अभियान चलाया हुआ है। रोजाना बसें सीज की जा रही है। अगर इसके बाद भी ये बसे चल रही हैं तो संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को तलब किया जाएगा। कोई भी डग्गामार वाहन नहीं चलने दिया जाएगा। ओपी सिंह, आरटीओ सिटी