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यूपी के देसी छोरे ने विरोधियों को 'गोल्ड' से दिया जवाब, जर्काता जाने से पहले उठ रहे थे ये सवाल

Tue, 21 Aug 2018 08:35 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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सौरभ चौधरी
इंडोनेशिया में चल रहे एशियाड खेलों में गोल्ड जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले शूटर सौरभ चौधरी जर्काता पंहुचने से पहले सवालों के घेरे में आ गए थे। उनके अभ्यास को लेकर नेशनल राइफल एसोसिएशन से उन पर सवाला उठाया था। हालांकि सौरभ ने एनआरएआई को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण दिया था। आगे जानें आखिर 'गोल्डन बॉय' पर क्यों उठाया गया सवाल:-
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एनआरएआई ने जर्काता जाने से पहले उठाया था सवाल

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सौरभ चौधरी - फोटो : अमर उजाला
एशियाई खेलों के लिए टीम में जगह मिलने के बाद सौरभ चौधरी के दिल्ली में अभ्यास पर जूनियर टीम के कोच जसपाल राणा ने एनआरएआई को पत्र लिखकर पूछा था। जूनियर टीम का कैंप भोपाल में चल रहा था, जबकि सौरभ दिल्ली की तुगलकाबाद रेंज में अभ्यास कर रहा था। इसके बाद सौरभ ने पत्र लिखकर स्पष्टीकरण दिया था कि एशियाई खेलों के लिए चयनित खिलाड़ी दिल्ली में अभ्यास कर रहे हैं, इस वजह से वह सीनियर खिलाड़ियों के बीच ही अभ्यास करना चाहता है। 
 
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जूनियर टीम भोपाल में लेकिन सौरभ दिल्ली में कर रहे थे प्रैक्टिस

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सौरभ चौधरी - फोटो : अमर उजाला
पिछले दिनों जूनियर वर्ल्ड कप की व्यक्तिगत, टीम और मिक्सड डबल में सौरभ चौधरी ने जर्मनी के सुहल में तीन स्वर्ण पदक जीते थे। इसके बाद ट्रायल हुए और सौरभ का चयन एशियाई खेलों के लिए हुआ। एक से 13 अगस्त तक जूनियर टीम का कैंप मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित साई सेंटर में लगाया गया, जबकि एशियाई खेलों के लिए चयनित स्कवायड का  कैंप दिल्ली की तुगलकाबाद रेंज में लगाया। सौरभ अभ्यास के लिए भोपाल नहीं पहुंचा और तुगलकाबाद में अभ्यास किया।
 

पत्र लिखकर दिया था यह जवाब

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सौरभ के गांव जश्न मनाते परिजन - फोटो : अमर उजाला
जूनियर टीम के कोच जसपाल राणा ने नेशनल राइफल एसोसिएशन को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि सौरभ चौधरी अभ्यास के लिए भोपाल नहीं पहुंचा। इस पर सौरभ ने एनआरएआई को पत्र लिखा कि वह चयनित स्कवायड में शामिल है और सीनियर खिलाड़ियों के बीच ही अभ्यास करना चाहता है। इसके बाद सौरभ को दिल्ली में ही अभ्यास की छूट मिली।  
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कडी मेहनत ने दिलाया सुनहरा तमगा

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घर में प्रैक्टिस करता था सौरभ - फोटो : अमर उजाला
सौरभ के संघर्ष की कहानी काफी भावुक कर देने वाली है। उनके भाई के अनुसार कलीना से कुछ किशोर रोजाना शूटिंग के लिए बिनौली जाते थे। मार्च 2015 में किसान जगमोहन सिंह के बेटे सौरभ चौधरी ने शूटिंग सीखने के इच्छा जताई। सर्दी गर्मी हर मौसम में वह रोज 12 किमी का सफर ऑटो से करते हुए कलीना से बिनौली तक जाता रहा और यहां करीब आठ से नौ घंटे तक नियमित अभ्यास करने से वह तपकर कुंदन बन गया। 
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सर्दी या गर्मी सुबह पांच बजे अभ्यास में जुट जाते हैं सौरभ

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सौरभ के गांव जश्न मनाते परिजन - फोटो : अमर उजाला
खास बात यह है कि एशियाड में गोल्ड जीतने वाले सौरभ सबसे युवा शूटर हैं। गांव वाले बताते हैं कि सौरभ पूरी तरह निशानेबाजी को समर्पित है। गांव के स्कूल से हाईस्कूल में पढ़ाई कर रहा है। सुबह पांच बजे रेंज पर पहुंचकर प्रैक्टिस में जुट जाता था। सौरभ के दादा का कहना है कि उनके पोते ने गोल्ड जीतकर गांव, मेरठ, प्रदेश के साथ ही देश का नाम रोशन किया है।
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पिता ने कहा आज पूरी हुई तपस्या

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सौरभ के गांव जश्न मनाते परिजन - फोटो : अमर उजाला
सौरभ के पिता जगमोहन सिहं के मुताबिक ट्रेनिंग के समय बेटे को पिस्टल दिलाने के पैसे नहीं थे। लेकिन जब उसने पहला मेडल जीता तो हौंसला बढ़ा। इसके बाद करीबियों से पैसा इक्ट्ठा करके पिस्टल दिलाई थी आज तपस्या पूरी हुई। सौरभ के माता-पिता बेहद खुश हैं। उनके पिता का कहना है कि उनकी तपस्या आज पूरी हो गई है।
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