असदुद्दीन ओवैसी की सभा में मौजूद समर्थक
- फोटो : अमर उजाला
योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनते नहीं देखना चाहते
ओवैसी ने कहा कि एआईएमआईएम योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनते नहीं देखना चाहती। उन्होंने पहले भी कहा है कि जो दल योगी आदित्यनाथ को दोबारा मुख्यमंत्री बनने से रोकना चाहते हैं, एआईएमआईएम उनके साथ जाने को तैयार है।
उन्होंने भाजपा की वर्ष 2014, 2017, 2019, 2022 और 2024 की चुनावी जीत का उल्लेख करते हुए विपक्षी दलों की रणनीति पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि प्रदेश की राजनीति में चुनाव लड़ने और राजनीतिक गठजोड़ को लेकर सभी दलों के लिए समान मापदंड होने चाहिए।
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सपा-कांग्रेस समेत विपक्षी दलों से किए सवाल
एआईएमआईएम प्रमुख ने समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बसपा और आम आदमी पार्टी के चुनाव लड़ने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने करीब 380, कांग्रेस और बसपा ने लगभग 400-400 तथा आम आदमी पार्टी ने करीब 300 उम्मीदवार उतारे थे।
ओवैसी ने सवाल किया कि जब ये पार्टियां चुनाव लड़ती हैं, तब उनसे यह नहीं पूछा जाता कि उनके मैदान में उतरने से किसे फायदा होगा, लेकिन एआईएमआईएम के चुनाव लड़ने पर उसे निशाना बनाया जाता है। उन्होंने इसे राजनीतिक दलों के अलग-अलग रवैये का उदाहरण बताया।
असदुद्दीन ओवैसी की सभा में मौजूद समर्थक
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बिहार और महाराष्ट्र की घटनाओं का भी किया जिक्र
ओवैसी ने बिहार में एआईएमआईएम के चार विधायकों के दूसरे दल में जाने और महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल अलग-अलग घटनाओं पर अपनी सुविधा के अनुसार प्रतिक्रिया देते हैं। उनके अनुसार, चुनावी राजनीति में सभी दलों के लिए एक समान मापदंड अपनाया जाना चाहिए।
उन्होंने मकानों पर कार्रवाई, मस्जिदों से जुड़े विवाद और लोगों को जेल भेजे जाने के मामलों का भी उल्लेख किया। रामपुर के पूर्व विधायक आजम खान का जिक्र करते हुए ओवैसी ने सवाल किया कि यदि वह उनसे मिलने नहीं जाते, तो क्या दूसरे राजनीतिक दल उनसे मिलने जाते।
ओवैसी ने कहा कि अल्पसंख्यक समाज के मुद्दों को केवल चुनाव के समय तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की समस्याओं, जमीन के विवादों और इबादतगाहों से जुड़े मामलों पर भी राजनीतिक दलों को आवाज उठानी चाहिए।