माछरा। श्रीराम लीला के मंच पर कलाकारों ने दशरथ मरण और भरत मिलाप की रामलीला का मंचन किया।
शिकार के दौरान राजा दशरथ हिरण समझकर एक शब्दभेदी बाण चलाते हैं परंतु वह बाण श्रवण कुमार को लग जाता है। इससे श्रवण के प्राण चले जाते हैं। राजा दशरथ श्रवण कुमार के माता-पिता को पानी पिलाने के लिए जाते हैं। दशरथ उन्हें बताते हैं कि उनके पुत्र की मृत्यु एक बाण लगने से हो गई तो वह दोनों राजा दशरथ को श्राप देते हैं कि जिस प्रकार हम अपने पुत्र के वियोग में अपने प्राणों का त्याग कर रहे हैं तू भी उसी प्रकार से पुत्र वियोग में प्राण का त्याग करेगा। दोनों पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग देते हैं और इसी प्रकार का दृश्य राजा दशरथ अपनी शैय्या पर पड़े हुए देखते हुए अपने प्राणों का त्याग कर देते हैं।
भरत को जैसे ही राम के वनवास का पता चलता है तो वह राम को वापस लाने के लिए पंचवटी की ओर प्रस्थान करते हैं परंतु राम वनवास का प्रण नहीं छोड़ते और वापस आने से मना कर देते हैं। भरत कहते हैं वह अपनी चरण पादुका उन्हें दें जिससे वह उन्हें सिंहासन पर रखकर अपने कार्यवाहक राजा के रूप में अपने कर्तव्य का निर्वाह करें और 14 वर्ष के उपरांत आकर अपना राज्य राम संभालें।