संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। मेरठ कॉलेज के आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चयन प्रकोष्ठ की ओर से शनिवार को रामकुमार गुप्ता सभागार में शिक्षण, अधिगम एवं अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग विषय पर संगोष्ठी हुई। इसमें मुख्य वक्ता स्कूल ऑफ ग्लोबल अफेयर्स के प्रो. आरसी शर्मा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता चौथी औद्योगिक और शैक्षिक क्रांति की आधारशिला है। शिक्षण की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों द्वारा अनुकरण खेलों (सिम्युलेशन गेम्स) का प्रयोग नवीन शिक्षण विधि के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र की नींव वैज्ञानिक एलन ट्यूरिंग ने रखी थी। उन्होंने यंत्र की बुद्धिमत्ता को परखने की परीक्षा प्रस्तुत की। आगे चलकर जॉन मैकार्थी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता शब्द को परिभाषित किया। उन्होंने डीपसीक प्रणाली का उदाहरण प्रस्तुत किया। इसमें पहली बार मशीन की सोचने की प्रक्रिया प्रत्यक्ष रूप से देखी गई। उन्होंने प्रोफेसर अशोक गोयल द्वारा प्रयुक्त शिक्षण सहायक गिल वॉटसन सहित अन्य पुस्तकों के लेखन के लिए विकसित यंत्र विधि का भी उल्लेख किया। संचालन डॉ. हरगुन साहनी एवं डॉ. यूनिक अरोड़ा ने किया। इस अवसर पर विवेक गर्ग, प्राचार्य प्रो. युद्धवीर सिंह, प्रो. सीमा पंवार, प्रो. अनिल राठी, प्रो. अर्चना सिंह आदि मौजूद रहे।