अहंता ही संसार की जड़ : कृष्णा संजय
मवाना। भक्ति प्रकृति सेवा संस्थान द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को गोकुल धाम के पीठाधीश्वर कृष्णा संजय महाराज ने बताया कि भागवत कथा शरणागति का मूल मंत्र है। शरणागति सबसे सुगम एवं सर्वश्रेष्ठ साधन है। परंतु अभिमानी व्यक्ति शरण नहीं हो पाता। इसलिए सबसे पहले अहंता को बदलने की बहुत आवश्यकता है। अहंता ही संसार की जड़ है। राग द्वेष रहित क्रियाएं होने से गृहस्थ भी सुधर जाएगा।
कथावाचक ने कहा कि जिस साधन में आपका मन लग जाएगा, वह साधन तेज हो जाएगा। जिससे भगवान में ज्यादा तल्लीनता हो, भगवान से ज्यादा संबंध जुड़े, वह साधन तेज हो जाता है। जिस प्रकार रोजाना रोटी खाते हैं तो उसमें नित्य नया रस मिलता है। ऐसे ही रोजाना सत्संग करने से नित्य नया रस मिलता है। दुनिया आपसे अच्छे बर्ताव की आशा रखती है। आप अच्छा बर्ताव नहीं करेंगे तो लोगों को धक्का लगेगा। धन से भी अधिक मूल्य धर्म तथा ईश्वर का समझना चाहिए। धर्म पालन करने योग्य और ईश्वर प्राप्त करने योग्य है। सुधार के नाम पर संघर्ष का जन्म इसी प्रमाद से होता है।
उन्होंने कहा कि जीवन में दुख तो संसार की देन है, पर आनंद तो स्वयं का होना चाहिए। अगर हम आनंदित होना ही चाहते हैं तो अकेले भी हो सकते हैं। केवल दुखी होने के लिए ही दूसरों की जरूरत पड़ती है। जब मनुष्य भगवान के सिवाय दूसरी सत्ता मानकर उसको महत्व देते हैं, तभी कामना पैदा होती है। जिससे मनुष्य माया से मोहित हो जाते हैं और हम जीते रहें तथा भोग भोगते रहें, यह बात उनको जंच जाती है।
हरि से प्रेम करें, शरीर से प्रेम है तो आसन करें, सांस से प्रेम है तो प्राणायाम करें। सभी ने वामन जन्मोत्सव अर्थात सत्य महोत्सव मनाया। यजमान मनोज कंसल, पिंटू, अजीत, बीना, अशोक चौधरी, विक्की वर्मा, दीपांशु गोयल, फूली देवी आदि रहे।