मेरठ। 20 दिसंबर के उपद्रवियों को गिरफ्तार करने के पुलिस अधिकारियों के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। पुलिस का दावा है कि 165 उपद्रवियों के नाम पते की जानकारी जुटाकर उनको मुकदमे में शामिल कर लिया है। नुकसान की भरपाई के लिये उपद्रवियों को नोटिस भी भेज दिया है। लेकिन पुलिस इनकी गिरफ्तारी के बजाय पीएफआई और एसडीएफआई में उलझकर रह गई है। उपद्रवियों की गिरफ्तारी करना पुलिस के लिये बड़ी चुनौती बन गया है। इस पर शासन ने भी नाराजगी जताकर जवाब मांग लिया है।
शहर में चार घंटे उपद्रव होने के बाद शांति व्यवस्था बनाने की अपील पुलिस व प्रशासन लगातार कर रहा है। पुलिस गुपचुप तरीके से उपद्रवियों के खिलाफ सुबूत जुटा रही है। वहीं, पुलिस के खिलाफ भी लोग सुबूत एकत्र कर रहे हैं। 15 दिन बीतने के बावजूद भी उपद्रव का वीडियो वायरल होने का सिलसिला चल रहा है। कभी उपद्रवियों का हिंसा करते हुए वीडियो वायरल हो रहा है तो लिसाड़ीगेट के लोग पुलिस का वीडियो वायरल कर रहे हैं। उपद्रव को पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने करीब से देखा है। उपद्रवियों ने कानून व्यवस्था की खुलेआम धज्जियां उड़ाईं। अधिकारियों, पुलिस फोर्स और आरएएफ को जान तक बचानी पड़ी।
गिरफ्तारी पर लगा ब्रेक
पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया, सोशल डेमोक्रेेटिक ऑफ इंडिया संगठन के चार आरोपियों समेत 15 लोगों को पुलिस उपद्रव के मामले में जेल भेज चुकी है। अब 15 दिन बीत चुके हैं। लेकिन पुलिस किसी को गिरफ्तार करने का साहस नहीं जुटा पा रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि उपद्रव करने वालों की गिरफ्तारी होगी। वहीं, उपद्रवियों के पक्ष में लगातार बयानबाजी की जा रही है कि अगर दबिश देकर गिरफ्तारी हुई तो फिर से मामला तूल पकड़ सकता है। जिसके चलते पुलिस भी डरी हुई है कि कानून व्यवस्था बनी रहे। हर शुक्रवार को नमाज अदा कराने के लिये भी भारी पुलिस फोर्स लगाना पड़ रहा है।
शासन ने मांगा जवाब
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में मेरठ से सबसे ज्यादा अराजकता हुई है। मेरठ में ही उपद्रव के दौरान छह युवकों की मौत हुई। वहीं, पुलिस के द्वारा कार्रवाई बहुत कम हो पाई। इसको लेकर शासन पुलिस प्रशासन से जवाब मांग रहा है। इसको लेकर पुलिस में हड़कंप मचा है कि उपद्रवियों पर कैसे कार्रवाई होगी। पड़ोसी जिले मुजफ्फरनगर में 73 उपद्रवियों की गिरफ्तारी हुुई है। जबकि वहां पर सरकारी क्षति बहुत कम हुई।
प्लान बनाते ही शुक्रवार आ जाता
पुलिस के निशाने पर 165 उपद्रवी हैं, जिन्हें गिरफ्तार करना है। पुलिस अधिकारी उपद्रवियों की गिरफ्तारी का प्लान बनाते है, तभी शुक्रवार को जुमे की नमाज का हवाला दे दिया जाता है। दो सप्ताह सकुशल बीत चुके हैं। लेकिन जुमे की नमाज से पहले पुलिस शांति व्यवस्था बनाने में जुट जाती है। उपद्रवियों की गिरफ्तारी के लिये पुलिस के प्लान फेल साबित हो रहे है। पुलिस अभी भी शांति व्यवस्था बनाने की अपील कर रही है।
गिरफ्तारी होना तय
जिन हाथों ने पत्थर और गोलियां चलाई हैं, उनकी गिरफ्तारी होनी तय है। क्राइम मीटिंग में भी गिरफ्तारी के लिये जोर दिया गया है। शांति व्यवस्था बनाकर कार्रवाई करेंगे। गोली चलाने वाले तीनों उपद्रवियों की पहचान हो चुकी है, जिन पर 20-20 हजार का इनाम है। सबसे पहले पुलिस उनको गिरफ्तार करेगी। -अजय साहनी, एसएसपी