- अदालत ने नौ माह की सजा व 12 लाख 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। अपर सत्र न्यायाधीश प्रकाशचंद्र शुक्ला ने चेक बाउंस के मामले में कुसुमवीर की अपील को निरस्त करते हुए निचली अदालत द्वारा उसे सुनाई गई सजा को कायम रखा है। निचली अदालत ने कुसुमवीर को एक वर्ष नौ माह की सजा व 12 लाख 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया था। अपील निरस्त होने के बाद न्यायालय में पेश नहीं होने पर एडिशनल कोर्ट के न्यायाधीश आरए कौशिक ने कुसुमवीर की गिरफ्तारी के लिए बिना जमानती वारंट व अर्थदंड की वसूली के लिए रिकवरी वारंट जारी किए हैं।
बिजनौर के मोहल्ला शंभा बाजार निवासी परल जैन ने एडिशनल कोर्ट में दाखिल परिवाद में कहा था कि वह कई वर्ष पूर्व डब्लूएचओ में नौकरी करता था। कुसुमवीर निवासी गांव गौसपुर टोपरी, थाना हल्दौर ने इसी विभाग में अपनी गाड़ी किराए पर लगा रखी थी। उसके कुसुमवीर से पारिवारिक संबंध हो गए। कुसुमवीर ने उससे अपनी खेती की जमीन बेचने की इच्छा जताई। पांच बीघा जमीन दो लाख 50 हजार रुपये के हिसाब से बेचना तय हुआ। उसने कुसुमवीर को 23 फरवरी 2014 को सात लाख रुपये अदा कर दिए। शेष राशि बैनामे के समय देने की बात तय हुई। कुसुमवीर ने उसे बैनामा नहीं किया। और उससे ली गई धनराशि के बदले में 27 मार्च 2014 को सात लाख रुपये का चेक दिया। इस चेक को जब उसने अपने खाते में जमा किया तो यह चेक बाउंस हो गया।
उसके बाद भी चेक की धनराशि का भुगतान उसने नहीं किया। तब उसने चेक बाउंस का केस दाखिल किया। इस मामले में एडिशनल न्यायालय के न्यायधीश आरए काैशिक ने 29 अप्रैल 2022 को कुसुमवीर को चेक बाउंस का दोषी पाते हुए एक वर्ष नौ माह के कारावास व 12 लाख 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया था। इस आदेश के विरुद्ध कुसुमवीर ने सत्र न्यायालय में अपील दाखिल की थी। यह अपील 23 मई 2023 को निरस्त कर दी गई है और उसे 26 मई 2023 को एडिशनल कोर्ट में पेश होने को कहा है। कोर्ट में पेश नहीं होने पर उसके खिलाफ गिरफ्तारी व वसूली वारंट जारी करने की कार्रवाई शुक्रवार को की गई है।