ऑनर किलिंग की शिकार लड़की को न्याय दिलाने के लिए जब दूसरी लड़कियां आवाज उठाती हैं तो अपना ही परिवार विरोध करता है। कोई नहीं चाहता कि उनकी बेटी सड़क पर उतरे और ऑनर किलिंग का विरोध करे। निशा, गरिमा, प्रियंका और समूह से जुड़ी लड़कियों के साथ भी यही हुआ। बकौल निशा परिवार ने हमें रोका, तुम फंस जाओगी लेकिन हमने उनकी बात नहीं मानी। हमने परिवार को समझाया कि लड़कियों पर अत्याचार होता रहेगा, किसी को इसके खिलाफ आवाज उठानी होगी।
लड़का, लड़की जो भी है, माता-पिता को लगता है कि वो गलत राह पर जा रहा है तो उसकी काउंसिलिंग होना चाहिए। उसे समझाना चाहिए। हत्या करना अपराध है, सजा का विकल्प नहीं।
डॉ. पूनम देवदत्त, मनोविज्ञानी
पश्चिमी उप्र में अक्सर लड़कियों के साथ ऑनर किलिंग की घटनाएं होती हैं। अपराध के खिलाफ बेटियों ने जो जंग छेड़ी है वो एक संदेश है।
-मारियो नोरोन्हो, चरखा फाउंडेशन
2019 में जिलेवार ऑनर किलिंग की घटनाएं
मेरठ- 05
मुजफ्फरनगर- 04
बिजनौर- 01
शामली- 02
सहारनपुर- 02
बागपत- 02